सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर सुनवाई: ममता बोलीं- बंगाल को टारगेट किया जा रहा
नई दिल्ली।
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पश्चिम बंगाल में बहुत जल्द विधानसभा चुनाव 2026 होने वाले हैं, वहां वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर चल रहे विवाद के बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। सुप्रीम कोर्ट ने आज स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन मामले की सुनवाई की।इस संबंध में सीएम कोर्ट के सामने पेश हुईं।सुनवाई से पहले ममता बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी के घर से सुप्रीम कोर्ट के लिए निकलीं।

सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया को तमिलनाडु में वोटर रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान ‘लॉजिकल डिस्क्रपेंसी’ लिस्ट में कैटेगरी में आए वोटर्स के नाम पब्लिश करने का निर्देश दिया था। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने तमिलनाडु में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रोसेस को प्रोसेस में गड़बड़ी के आधार पर चुनौती देने वाली कई पिटीशन पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए।सुनवाई के दौरान खुद ममता बनर्जी कोर्ट में मौजूद रहीं।उन्होंने अपना केस लड़ने और बहस करने की इजाजत मांगी थी।

सीजेआई ने ममता से कहा कि वे अपने वकील को मामले पर बहस करने दें और जवाब दाखिल करने के लिए दो दिन का समय दिया। बेंच ने कहा कि वह सोमवार को मामले पर फिर से सुनवाई करेगी।वहीं, ममता का कहना है कि वे माइक्रो-ऑब्जर्वर नियुक्त करके सिर्फ बंगाल को निशाना बना रहे हैं। ममता ने कहा कि डेमोक्रेसी बचाइए। इस पर सीजेआई ने ममता को नोटिस जारी किया है। ममता ने आगे कहा कि पहले फेज में 58 लाख नाम हटाए गए और उनके पास फॉर्म 6 के जरिए अपील करने का कोई स्कोप नहीं है।

दूसरे फेज में 1.30 करोड़ नाम हटाए गए, दूसरे राज्यों में वे क्या सिस्टम बनाए हुए हैं, वे सिर्फ पश्चिम बंगाल को टारगेट कर रहे हैं, सिर्फ बंगाल के लिए उन्होंने पश्चिम बंगाल के लोगों पर बुलडोजर चलाने के लिए ये माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त किए हैं।ममता बनर्जी ने आगे कहा कि लॉजिकल अंतर का मामला इलेक्टोरल रोल से नहीं हटाया जाना चाहिए और इसे डीओ या ईआरओ द्वारा क्लियर किया जाना चाहिए, माइक्रो ऑब्ज़र्वर द्वारा नहीं।

ममता बनर्जी ने कहा कि 100 से ज्यादा लोग मर चुके हैं और कई बीएलओ की मौत हो चुकी है और परेशान किया जा रहा है। इसके साथ-साथ पूछा कि असम में एसआईआर क्यों नहीं हुआ, बंगाल में ही क्यों हुआ। सीजेआई ने कहा कि कोर्ट सीएम के उठाए गए मुद्दों पर जवाब देने के लिए ईसीआई को एक दिन का समय देने को तैयार है। सीएम ममता ने कहा कि एसआईआर के जरिए बंगाल को टारगेट क्यों किया जा रहा है, असम को खुली छूट दी जा रही। वहीं, मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग को व्हाट्सऐप आयोग कहा।

सीएम ममता बनर्जी ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान बोलने की अनुमति मांगी है, उन्होंने कहा कि मैं समझा सकती हूं क्योंकि मैं उसी राज्य से आती हूं। इस पर चीफ जस्टिस बोले कि बेशक, इसमें कोई शक नहीं है। बोलने की इजाजत मिलने पर ममता ने केस की सुनवाई कर रही बेंच को धन्यवाद दिया। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि बंगाल में, मिस्टर द्विवेदी को ‘दिबेदी’ बोला जाएगा, यह देखते हुए कि बंगाली भाषा में ‘व’ की आवाज नहीं है।

चीफ जस्टिस ने जवाब दिया कि कम से कम उनका अपना नाम तो सही बोला जाएगा, जिस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीच में टोकते हुए कहा कि ऐसा नहीं होगा।सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने कहा कि नाम में अंतर से जुड़े मुद्दे उपलब्ध सीमित समय का एक बड़ा हिस्सा ले रहे हैं और वोटरों को गंभीर परेशानी हो रही है।चीफ जस्टिस ने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी से पूछा कि कुछ अंतर स्थानीय बोलियों और उच्चारण में अंतर के कारण होते हैं,ऐसे मुद्दे पूरे देश में होते हैं।चीफ जस्टिस ने सुनवाई करते हुए कहा कि कोर्ट को बताया गया था कि लिस्ट ही बातचीत का अकेला तरीका नहीं है, संबंधित लोगों को अलग अलग नोटिस भी जारी किए जा रहे हैं।








