समाज और परंपरा के निर्वहन से संस्कृति जीवित: डॉ. अशोक

समाज और परंपरा के निर्वहन से संस्कृति जीवित: डॉ. अशोक

पिंडरा, वाराणसी।
नितेश गुप्ता 
तहलका 24×7 
              काशीराज परिवार के सदस्य डॉ. अशोक कुमार सिंह  ने कहाकि संस्कृत और परंपरा का निर्वहन से ही संस्कृति जीवित है। उक्त बातें बुधवार को पिंडरा क्षेत्र के धरसौना में शिक्षाविद व समाजसेवी राम सनेही बिहारी चौबे के पुण्यतिथि पर वंशवृक्ष पुस्तक के विमोचन के दौरान कही।उन्होंने कहा कि समाज को संगठित होकर अपने वंशज को जोड़ने की जरुरत है।
विशिष्ट अतिथि काशी विद्यापीठ के पूर्व विभागाध्यक्ष  प्रो. अनिल उपाध्याय ने कहा कि परम्परा और संस्कृति का वाहक यह पुस्तक बनेगी।कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता कमलाकर तिवारी ने कहा कि समाज सजता है तो हर तबका सजता है। वैदिक परंपरा में जन्म से हर व्यक्ति शुद्र होता है। लेकिन कर्मों से शुद्धता  को प्राप्त करता है। यह पुस्तक घर परम्परा को आगे बढ़ाने का काम करेगी।
अध्यक्षता राजेश्वर चौबे, संचालन मनोज चौबे व धन्यवाद ज्ञापन राधेश्याम चौबे ने किया।इस दौरान पिंडरा ग्राम प्रधान संघ के अध्यक्ष अनिल चौबे, मनीष चौबे, विकास चौबे, अवधेश, राकेश, रुद्र नारायण, राम जियावन, सूबेदार, कैलाश, दिवाकर समेत अनेक गणमान्य रहे।
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