पटाखों पर पूरी तरह बैन लगाना असंभव: सुप्रीम कोर्ट
# दिल्ली-एनसीआर के राज्यों ने कहा- बच्चों को त्योहार मनाने दें, बेरोकटोक पटाखे फोड़ने की अनुमति मिले
नई दिल्ली।
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दिवाली से पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर बैन हटाने की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना व्यावहारिक नहीं है और इसका पालन भी मुश्किल है।चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि ऐसे प्रतिबंधों का अक्सर उल्लंघन होता है।बेंच ने ग्रीन पटाखों के निर्माण और बिक्री की अनुमति देने संबंधी याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

सुनवाई के दौरान केंद्र और दिल्ली-एनसीआर के राज्यों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि बच्चों को त्योहार मनाने दिया जाए, बिना समय सीमा के पटाखे फोड़ने की छूट होनी चाहिए। बता दें कि 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार दिल्ली एनसीआर में पटाखों पर रोक लगाई थी और केवल ग्रीन पटाखों की अनुमति दी थी। इसके बाद 2018 में पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया, जो अब तक जारी है। 19 दिसंबर 2024 को दिल्ली सरकार ने 2025 के पूरे साल के लिए बैन का नोटिफिकेशन जारी किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या सात वर्षों से चले आ रहे इस प्रतिबंध का कोई ठोस असर पड़ा है। जवाब में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि प्रदूषण का स्तर लगभग पहले जैसा ही है, हालांकि कोविड लॉकडाउन के दौरान उद्योग और वाहन गतिविधियों पर रोक से प्रदूषण में कमी जरुर आई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रीन पटाखों में बेरियम, नाइट्रेट, पोटैशियम क्लोरेट और सल्फर जैसे हानिकारक रसायनों का उपयोग बहुत कम या बिल्कुल नहीं किया जाता।








