यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान नहीं: हाईकोर्ट
# हाईकोर्ट की टिप्पणी, कहा- सिर्फ स्क्रूटनी का प्रावधान
प्रयागराज।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की इंटरमीडिएट परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान नहीं है, इसलिए इसे एक अधिकार के रुप में नहीं मांगा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अधिनियम में केवल सन्निरीक्षा (स्क्रूटनी) का प्रावधान है, पुनर्मूल्यांकन का नहीं। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने पुनर्मल्यांकन की मांग में दायर याचिका खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक सरन ने फैज कमर की याचिका पर दिया।

मेरठ निवासी फैज कमर ने 2025 की इंटरमीडिएट परीक्षा दी थी। परिणाम से असंतुष्ट होकर उन्होंने हिंदी और जीव विज्ञान विषयों में स्क्रूटनी के लिए आवेदन किया। 5 अगस्त 2025 को बोर्ड कार्यालय में उन्हें उनकी उत्तर पुस्तिकाएं दिखाई गईं, लेकिन वे हिंदी और जीव विज्ञान के कई प्रश्नों में मिले अंकों से संतुष्ट नहीं थीं। याची ने उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए क्षेत्रीय सचिव को प्रत्यावेदन दिया, जिसे 9 सितंबर 2025 को खारिज कर दिया गया। इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दोबारा मूल्यांकन की मांग की।

राज्य सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि स्क्रूटनी के दौरान जीव विज्ञान के पेपर में योग में त्रुटि पाई गई थी। सुधार के बाद छात्र के अंक 56 से बढ़कर 58 हो गए और कुल प्राप्तांक 439 से बढ़कर 441 हो गए। हालांकि, हिंदी विषय के अंकों में कोई बदलाव नहीं हुआ। बोर्ड ने तर्क दिया कि ‘यूपी इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921’ में उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का कोई प्रावधान नहीं है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के रण विजय सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के निर्णय का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि यदि परीक्षा नियम पुनर्मूल्यांकन की अनुमति नहीं देते, तो न्यायालय इसे निर्देशित नहीं कर सकता, जब तक कि कोई गंभीर त्रुटि स्पष्ट रुप से न दिखाई दे। कोर्ट ने कहा कि याची का तर्क था कि उसने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था और उसे हिंदी में 90 और जीव विज्ञान में 96 अंकों की उम्मीद थी। कोर्ट ने कहा कि केवल छात्र की उम्मीद के आधार पर पुनर्मूल्यांकन का आदेश नहीं दिया जा सकता।







