अदालत में सेशन जज को धमकाने वाले एसपी का हाईकोर्ट ने 40 साल बाद लिया संज्ञान
प्रयागराज।
तहलका 24×7
मुकदमे की सुनवाई के दौरान भरी अदालत में एसपी ललितपुर द्वारा ट्रायल कोर्ट जज को धमकी दिए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने घटना के करीब 40 साल बाद संज्ञान लिया। कोर्ट ने डीजीपी यूपी को हलफनामा दाखिल कर बताने के लिए कहा कि उस वक्त उन आरोपी अधिकारी पर क्या कार्रवाई की गई थी और क्या वे अभी भी जीवित हैं? वहीं, एक अन्य केस में हाईकोर्ट ने बिना अनुमति न्यायालय की कार्यवाही की वीडियोग्राफी करने को न्यायिक कार्यवाही में व्यवधान मानते हुए नोटिस जारी किया है।

वृंदावन व अन्य की अपील पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति संजीव की पीठ ने पाया कि सेशन जज ने 1988 में दिए अपने फैसले में इस बात का जिक्र किया है कि तत्कालीन एसपी ने उनको धमकाया था और थाने तक घसीट ले जाने की धमकी दी थी। बेंच ने पाया कि सेशंस जज ने फैसले में कहा है कि डिस्ट्रिक्ट सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस ने एक गुंडे की तरह व्यवहार किया और ट्रायल जज को धमकी दी।

अधिकारी की मौजूदा हालत के बारे में अनिश्चितता को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि हमें नहीं पता कि तत्कालीन एसपी बीके भोला, जो शायद अब तक रिटायर हो चुके होंगे, इस दुनिया में हैं या नहीं?कोर्ट ने डीजीपी को 9 दिसंबर तक एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें इन बिंदुओं को शामिल किया जाए कि क्या बीके भोला अभी हैं या नहीं?

क्या वह अभी भी सर्विस में हैं या पेंशन ले रहे हैं? अगर जिंदा हैं तो उनकी पूरी जानकारी, रहने का पता और पुलिस स्टेशन की जानकारी। डीजीपी को कोर्ट ने यह भी बताने का निर्देश दिया है कि 1988 के फैसले में ट्रायल जज के निर्देशों के आधार पर बीके भोला के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई थी?

# कोर्ट कार्यवाही की रिकार्डिंग करने वाले को नोटिस!
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना अनुमति न्यायालय की कार्यवाही की वीडियोग्राफी करने को न्यायिक कार्यवाही में व्यवधान मानते हुए ऐसा करने वाले पैरोकार अमित कुमार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा है कि क्यों न उसके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरु की जाए?यह आदेश न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने रावेंद्र कुमार धोबी की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया है।

कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 18 दिसंबर की तारीख लगाई है। जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान चित्रकूट के मोहनरवा गांव निवासी अमित कुमार बिना अनुमति कोर्ट कार्यवाही की रिकार्डिंग कर रहे थे। न्यायिक कार्यवाही की वीडियो रिकार्डिंग करना प्रथम दृष्टया गंभीर आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है। अमित कुमार ने मोबाइल से रिकॉर्डिंग करना स्वीकार भी किया। कोर्ट ने इसे न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप माना और नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।








