मेधावियों को उचित प्लेटफार्म तक पहुंचना मकसद: डॉ. एनपी सिंह
पिंडरा, वाराणसी।
नितेश गुप्ता
तहलका 24×7
भारतीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. एनपी सिंह ने कहाकि आदिवासी क्षेत्रों के मेधावी बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाकर उन्हें समाज के मुख्य धारा में शामिल कर योग्य नागरिक बनाने से ही समाज व देश की तरक्की होगी। पूर्व आईएएस व भारतीय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष ने उक्त बातें अपने गांव बरजी में सोमवार को स्थानीय पत्र प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान कही।

उन्होंने कहाकि मैं वर्षों से ऐसे बच्चों को समाज के मुख्य धारा में जोड़ना चाहता हूं जो संसाधनों से दूर हैं। आदिवासी इलाकों जैसे मिर्जापुर, छत्तीसगढ़ व झारखंड में काम करते आये हैं, वहां संस्थाएं चलाकर उन्हें शिक्षा दिलाने का काम कर रहा हूं।

वाराणसी, जौनपुर जिले में भी वनवासी व गरीब तबके से जुड़े मेधावी छात्रों को निःशुल्क नीट, इंजीनियरिंग और अन्य कोर्स कराकर रोजगार दिलाने के उद्देश्य से मेरी संस्था तथागत शिक्षण संस्थान लगातार प्रयासरत है।उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में कहाकि आदिवासी ही नही बल्कि समाज के ऐसे लोग जो आगे पढ़ना चाहते हो लेकिन संसाधन के साथ आर्थिक स्थिति ठीक नही है संस्था उनको हर सम्भव मदद कर रही हैं।उन्होंने बताया कि बनारस पब्लिक स्कूल में 10वीं कक्षा में 90 फीसदी से अधिक अंक अर्जित करने वाले सभी बच्चों को पूरी तरह शुल्क माफ कर दिए हैं। यह काम पिछले 5 वर्षों से लगातार किया जा रहा है।

12वीं में भी 90 से 95 फीसदी तक अंक अर्जित करने वाले बच्चों को कोचिंग की फीस स्वयं भुगतान कर रहे हैं। तथागत औद्योगिक शिक्षण संस्थान मिर्जापुर आईटीआई से लगायत अनेक कोर्स आदिवासी छात्राओं को कराया जा रहा है, जो रोजगार परक है। इस साल से बस्तर के आदिवासी व सतनामी समुदाय को मुख्य धारा में लाने के लिए नर्सरी से लेकर 12वीं तक नि:शुल्क शिक्षा की शुरुआत करने जा रही है।संस्था अब तक सैकड़ों युवाओं को रोजगार दे चुकी है।








