स्मार्ट मीटर पर बड़ा खुलासा: उपभोक्ता की सहमति के बिना प्रीपेड मीटर लगाना गैरकानूनी
नई दिल्ली/लखनऊ।
तहलका 24×7
बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक अहम कानूनी स्थिति स्पष्ट हुई है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए कहा है कि स्मार्ट मीटर प्रीपेड या पोस्टपेड,यह पूरी तरह उपभोक्ता की इच्छा पर निर्भर करेगा।उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के अनुसार,बिजली कंपनियां बिना उपभोक्ता की लिखित सहमति के प्रीपेड कनेक्शन नहीं दे सकतीं।यदि उपभोक्ता सहमत नहीं है,तो विभाग को पारंपरिक पोस्टपेड मीटर ही लगाना होगा।

इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश में चल रहे स्मार्ट मीटर अभियान पर सवाल उठाए हैं।परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का आरोप है कि करीब 70 लाख उपभोक्ताओं के घरों में बिना सहमति के प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए गए,जो कानून का सीधा उल्लंघन है।परिषद ने मांग की है कि सभी उपभोक्ताओं से दोबारा सहमति ली जाए।जो उपभोक्ता प्रीपेड नहीं चाहते,उनके मीटर तुरंत पोस्टपेड में बदले जाएं।

उपभोक्ताओं से कहा गया है कि नया मीटर लगवाते समय लिखित में अपनी पसंद (प्रीपेड/पोस्टपेड) जरूर दर्ज कराएं।किसी भी तरह की जबरदस्ती होने पर शिकायत दर्ज करें।वहीं केंद्रीय मंत्री के जवाब की मुख्य बातें रहीं कि बिना अनुमति प्रीपेड मीटर लगाना गैरकानूनी है।स्वेच्छा से प्रीपेड चुनने पर सुरक्षा राशि नहीं लगेगी।रियल-टाइम खपत निगरानी,संभावित छूट होगी।विशेष मामलों में बिना सहमति मीटर लगाने के लिए राज्य आयोग की मंजूरी जरुरी होगी।


















