लोक निर्माण विभाग: दो अफसर–दो एफआईआर

लोक निर्माण विभाग: दो अफसर–दो एफआईआर

# वेतन फाइल से शुरु हुई लड़ाई, ठेकेदार संघ तक पहुंची आग

जौनपुर।
एखलाक खान
तहलका 24×7 
               लोक निर्माण विभाग जौनपुर इन दिनों सड़क नहीं, सिस्टम की दरारें उधेड़ रहा है।विभाग के भीतर ऐसा टकराव सामने आया है,जिसमें वरिष्ठ खंडीय लेखाधिकारी और अधिशासी अभियंता आमने-सामने हैं और नतीजा,एक ही विभाग से दो-दो एफआईआर तक पहुंच चुकी है।मामला अब केवल व्यक्तिगत झगड़े तक सीमित नहीं रहा,बल्कि प्रशासनिक अनुशासन, राजनीतिक दबाव और ठेकेदार, अफसर गठजोड़ जैसे गंभीर सवालों को जन्म दे चुका है।
वरिष्ठ खंडीय लेखाधिकारी राम मिलन यादव ने पहले मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल से जुड़े दो विधायकों के प्रतिनिधियों ने उनके साथ मारपीट की। इस प्रकरण में अधिशासी अभियंता राजेंद्र वर्मा समेत तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
घटना के बाद से लेखाधिकारी कार्यालय से नदारद हैं, मोबाइल फोन स्विच ऑफ है,और विभाग में यह सवाल तैर रहा है कि अगर आरोप इतने गंभीर हैं,तो पीड़ित अधिकारी सामने क्यों नहीं आ रहे?
वहीं,दूसरी तरफ अधिशासी अभियंता राजेंद्र वर्मा ने भी चुप्पी नहीं साधी। उन्होंने दर्ज कराई गई अपनी FIR में बताया कि कुछ कर्मचारियों का वेतन नियमों के तहत अस्थायी रुप से रोका गया था,नियमों के खिलाफ वेतन पास कराने का दबाव डाला गया।इंकार करने पर अभद्र भाषा, जातिसूचक शब्दों और मारपीट की धमकी दी गई।अब सवाल यह है कि क्या वेतन फाइलें अब दबाव की राजनीति का हथियार बन चुकी हैं?
मामले ने तब नया मोड़ लिया जब लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार संघ के अध्यक्ष, जिन्हें स्थानीय स्तर पर “वीआईपी” कहा जाता है, जिलाधिकारी के पास ज्ञापन लेकर पहुंचे और खुलकर लेखाधिकारी के समर्थन में खड़े हो गए।यहीं से असली सवाल उठता है कि जब विवाद अफसर–कर्मचारी के बीच है, तो ठेकेदार संघ क्यों कूद पड़ा? क्या वेतन और विभागीय निर्णयों का सीधा असर ठेकेदारों के हितों से जुड़ा है? इस एंट्री ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया।
सूत्र बताते हैं कि लेखाधिकारी राम मिलन यादव पहले भी अभद्र व्यवहार के आरोपों में घिर चुके हैं।इसके अलावा वे लंबे समय से एक ही पटल पर तैनात हैं और अब तक उनका स्थानांतरण न होना भी कई सवाल खड़े करता है।फिलहाल ये मामला सिर्फ अफसरों की तकरार नहीं बल्कि विभाग की कार्यसंस्कृति,राजनीतिक दखल और ठेकेदार प्रभाव की परतें खोल रहा है।सच्चाई जांच के बाद सामने आएगी,लेकिन तब तक लोक निर्माण विभाग की फाइलों में सिर्फ सड़कें नहीं, सवाल भी दौड़ रहे हैं।
Previous articleस्वर्णकार समाज ने पहली बार मनाई भगवान नरहरि जयंती, हुआ भव्य आयोजन
Next articleबसंती देवी आईटीआई में आयोजित रोजगार मेले में 35 अभ्यर्थियों का चयन
Tahalka24x7
तहलका24x7 की मुहिम... "सांसे हो रही है कम, आओ मिलकर पेड़ लगाएं हम" से जुड़े और पर्यावरण संतुलन के लिए एक पौधा अवश्य लगाएं..... ?