स्वामी धारकुंडी महराज हुए ब्रह्मलीन, श्रद्धालुओं में गहरा शोक
# आस्था से सराबोर जौनपुर के दो व्यक्तियों ने दसकों पूर्व घर बार छोड़ खुद को कर दिया था समर्पित, तीन गुरुभाई स्वामी अड़गड़ानंद और अनुसुइया महराज में ज्येष्ठ थे धारकुंडी महराज
खुटहन, जौनपुर।
मुलायम सोनी
तहलका 24×7
सच्चिदानन्द स्वामी धारकुंडी महराज के ब्रह्मलीन होने की खबर शनिवार की रात पता चलते ही उनके श्रद्धालुओं में शोक की लहर छा गई। सैकड़ों श्रद्धालु उनके अंतिम दर्शन के लिए मध्यप्रदेश के सतना जिला स्थित धारकुंडी आश्रम के लिए प्रस्थान कर दिए।स्वामी जी ने शनिवार की रात मुंबई के बदलापुर स्थित आश्रम पर नश्वर शरीर को त्याग गोलोक सिधार गए। बताते हैं कि वे 102 वर्ष की उम्र में शरीर का परित्याग किए हैं।

परमहंस महराज के तीन शिष्यों, स्वामी अड़गड़ानंद और अनुसुइया महराज में सबसे बड़े सच्चिदानंद स्वामी धारकुंडी महराज थे। उनका जौनपुर से विशेष लगाव था। लगभग तीन दशक पूर्व दौलतपुर गांव निवासी व रेलवे विभाग में सतना स्टेशन पर स्टेशन मास्टर के पद पर तैनात रहे ताल्लुका दूबे उनके आश्रम में गए थे। स्वामी जी से इस कदर प्रभावित हुए कि नौकरी और परिवार छोड़ उन्हीं के शरणागत होकर रह गए। जिन्हें दूबे बाबा के नाम से जाना गया। इसी तरह महमदपुर गुलरा गांव निवासी जगदीश पांडेय घर छोड़कर आश्रम में ही रह गए।

उन्हें जगदीश बाबा की उपाधि मिली। वर्ष 1985 में धारकुंडी महराज का आगमन महमदपुर गुलरा और दौलतपुर गांव में हुआ था। तभी से यहां उनके हजारों श्रद्धालु बन गये।प्रत्येक गुरुपूर्णिमा को यहां से हजारों श्रद्धालु धारकुंडी आश्रम पहुंच उनका दर्शन पूजन करते चले आ रहे हैं।उनके गोलोक सिधारने की खबर से सभी श्रद्धालुओं में गहरा शोक छा गया।








