गाजीपुर : बरसात के लिए ग्रामीण पुराने टोटकों को आजमाने की तैयारी में..

गाजीपुर : बरसात के लिए ग्रामीण पुराने टोटकों को आजमाने की तैयारी में..

# “काल कलौटी, उज्जर धोती, काले मेधा पानी दे अब” टोटकों की तैयारी में ग्रामीण

खानपुर।
अंकित मिश्रा
तहलका 24×7
                   आषाढ़ का पूरा महीना बीत गया लेकिन बरसात की आस पूरी नहीं हुई। मॉनसून का इंतजार कर रहे किसान अब इंद्रदेव को मनाने के पारंपरिक टोटकों और पूजा पाठ का सहारा लेने को मजबूर हैं। पहले गांव में महिलाएं वर्षा लाने के लिए खेतों में हल चलाती थी। ऐसा करने से बरसात होने लगती थी। आसमान में बादल भले ही उमड़ रहे है, लेकिन बारिश की आस लगाए किसानों की उम्मीदें पूरी नहीं हो रही है।धान की रोपाई चुके किसान वर्षात नहीं होने से चिंतित है। पहले की तरह गांव के बच्चों को लेकर “काल कलौटी, उज्जर धोती, काले मेघा पानी दे” की गीत गवाते हुए धूल में नहाने लोटने की परंपरा को पुनर्जीवित करना पड़ेगा।

इसमें पहले बच्चे गांव में घरों के सामने कई बाल्टी पानी एकत्रित करके उसमें कीचड़ से सराबोर हो जाते हैं। सभी घरों से बच्चों को आंटा, चावल, आलू, तेल, मसाला, हल्दी, नमक खाद्य सामग्री दिया जाता है। इसके बाद बच्चे एक सहभोज कार्यक्रम आयोजित करते हैं। पहले यह कार्यक्रम गांवों में बिना किसी भेदभाव के बारिश नहीं होने पर होते थे। पर इस समय गांवों में एकरूपता का भाव नहीं होने के कारण यह कार्यक्रम कुछ गांव में ही आयोजित हो पाते है। बरसात होने की आस में किसान उम्मीद भरी निगाहों से बादल की तरफ टकटकी लगाए है।छिटपुट बूंदाबांदी हो रहा लेकिन खेतों में नमी पहुंचाने लायक अभी वर्षात नहीं हुई है। अच्छी वर्षात के लिए शिवलयों का अरघा भरा जाता है। शिवमंदिर में शिवलिंग के अरघा का जलनिकास बंद कर पूरा अरघा जल भरने पर शिवकृपा से अच्छी बरसात होती है।
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