इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: हलाला और तीन तलाक की आड़ में यौन शोषण स्वीकार्य नहीं
प्रयागराज।
तहलका 24×7
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निकाह,हलाला और तीन तलाक की आड़ में महिलाओं के यौन शोषण पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि व्यक्तिगत कानूनों की आड़ में किसी भी अपराध को संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

न्यायमूर्ति जे.जे.मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने मामले में पीड़िता के पूर्व पति,चाचा,मौलाना समेत अन्य आरोपियों की याचिकाएं खारिज कर दीं।खंडपीठ ने कहा कि हलाला और तीन तलाक जैसी प्रथाओं की आड़ में महिलाओं के यौन शोषण की अनुमति नहीं दी जा सकती।अदालत ने ऐसी प्रथाओं को समाज का”काला पन्ना”बताते हुए कहा कि ये संवैधानिक मूल्यों,समानता और मानवीय गरिमा के विरुद्ध हैं।

न्यायालय ने यह भी कहा कि ऐसे कृत्य न केवल कानूनन अपराध हैं,बल्कि समाज की सामूहिक अंतरात्मा को झकझोरने वाले हैं।अदालत ने प्रथम दृष्टया इस मामले को नाबालिग के साथ सुनियोजित सामूहिक दुष्कर्म का मामला मानते हुए इसकी गहन जांच आवश्यक बताई।


















