राष्ट्रपति मुर्मू की बंगाल यात्रा के दौरान अव्यवस्था का मामला, एमएचए के निर्देश डीएम को हटाया गया

राष्ट्रपति मुर्मू की बंगाल यात्रा के दौरान अव्यवस्था का मामला, एमएचए के निर्देश डीएम को हटाया गया

कोलकाता।
तहलका 24×7
              गृह मंत्रालय ने पिछले हफ्ते राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की बंगाल यात्रा के दौरान हुई अव्यवस्था के लिए दार्जिलिंग के जिला मजिस्ट्रेट और सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर को जिम्मेदार ठहराया।मंत्रालय ने दोनों बड़े अधिकारियों को उनके पद से हटाकर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजने का निर्देश दिया था।निर्देश का पालन करते हुए दार्जिलिंग के जिला मजिस्ट्रेट को उनके पद से हटा दिया गया।बताते चलें कि 7 मार्च को राष्ट्रपति मुर्मू के उत्तर बंगाल दौरे के दौरान सिलीगुड़ी में एक इवेंट की जगह में अचानक बदलाव और प्रोटोकॉल तोड़ने के आरोप लगे थे।
इस घटना को लेकर केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया। सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर सी. सुधाकर और दार्जिलिंग के डीएम मनीष मिश्रा को हटाने की सिफारिश की गई।राज्य सचिवालय ने इन सिफारिशों का एक हिस्सा मान लिया है।मनीष मिश्रा को गृह एवं पहाड़ी मामलों के विभाग में विशेष सचिव बनाया गया है।सुनील अग्रवाल को दार्जिलिंग का नया डीएम बनाया गया।हालांकि,टीएमसी सरकार ने अभी सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर सी. सुधाकर को नहीं हटाया है,क्योंकि यह कार्रवाई राज्य में विधानसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले की गई है।
सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब ने कहा अच्छा होगा कि मैं जल्दबाजी में कोई टिप्पणी न करूं।हालांकि,इस घटना के पीछे की असली वजह जनता के सामने बिल्कुल साफ है।मामले में जो भी कहना होगा,वह राज्य नेतृत्व बताएगा।सिलीगुड़ी भाजपा विधायक शंकर घोष ने कहा राष्ट्रपति का अपमान देश का अपमान है।गृह मंत्रालय की यह जिम्मेदारी थी कि वह इस मामले की जांच करे और उन्होंने ऐसा किया।राज्य की मुख्यमंत्री अक्सर पूछती हैं,क्या इस राज्य में आने वाला हर कोई हमसे यह उम्मीद करता है कि हम उनकी हर इच्छा पूरी करने के लिए इधर-उधर भागते रहें?
यही सोच प्रशासन में भी दिखी।गृह मंत्रालय को जरूर इस बात की जांच करनी चाहिए कि इस रवैये ने मौजूदा घटना पर कितना असर डाला।ऐसे फैसले कानून-व्यवस्था और तय प्रोटोकॉल को बनाए रखने के लिए जरूरी हैं।बबाकी की जांच केंद्र सरकार करे।बताते हैं कि 7 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इंटरनेशनल ट्राइबल एंड संथाल काउंसिल के 9वें कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए सिलीगुड़ी पहुंचीं।शुरु में कॉन्फ्रेंस विधाननगर के संतोषिनी स्कूल ग्राउंड में होने वाली थी,यह सिलीगुड़ी से सटे फांसीदेवा ब्लॉक का एक आदिवासी बहुल इलाका है।
हालांकि, राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए बाद में जगह को सिलीगुड़ी के पास ही बागडोगरा के गोसाईपुर में शिफ्ट कर दिया गया।फिर भी गोसाईपुर में कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने खुले मंच से ही जगह बदलने पर अपनी नाराजगी सबके सामने जाहिर की।कॉन्फ्रेंस के बाद वह सीधे बिधाननगर चली गईं, जहां उन्होंने इवेंट की जगह बदलने पर अपना बहुत ज्यादा गुस्सा जाहिर किया।उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को “बहन” कहने के बावजूद, उन्हें राज्य में आजादी से घूमने की इजाजत नहीं दी जा रही है।
राष्ट्रपति ने इवेंट की जगह बदलने के फैसले पर भी तीखे सवाल उठाए थे।इस घटना के बाद गृह मंत्रालय ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र लिखकर 24 घंटे के अंदर मामले पर रिपोर्ट मांगी।हालांकि,केंद्र सरकार राज्य की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं थी।इसके बाद केंद्र सरकार ने मामले में शामिल दो अधिकारियों सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर व दार्जिलिंग के जिला मजिस्ट्रेट मनीष मिश्रा को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजने का निर्देश दिया।
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