सुल्तानपुर : कूड़े के ढेर में मिलीं सरकारी अस्पताल की दवाएं
# एंटी बॉयोटिक, फाइलेरिया और उल्टी दस्त की दवाओं की एक्सपायरी मई 2023
सुल्तानपुर।
ज़ेया अनवर
तहलका 24×7
बल्दीराय क्षेत्र के वलीपुर स्थित नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पास शनिवार की सुबह सरकारी दवाएं कूड़े के ढेर में मिलीं। दवाओं में एंटी बॉयोटिक, फाइलेरिया और उल्टी दस्त में मरीजों को दिए जाने वाला ओआरएस के पैकेट शामिल हैं। इन दवाओं को जलाने का प्रयास भी किया गया था। कूड़े में मिलीं दवाओं की एक्सपायरी तिथि मई 2023 है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि आखिर हजारों रुपये कीमत की दवाओं को किसने और क्यों कूड़े के ढेर में फेंका है।

शनिवार सुबह पीएचसी पहुंचे लोगों को कूड़े के ढेर में सरकारी दवाएं फेंकी मिलीं। इनमें से कुछ दवाएं जल गई थीं। कुछ अधजली और कुछ सुरक्षित थीं। कूड़े के ढेर में मिले दवाओं के जो पत्ते मिले उनमें फाइलेरिया की दवा डाइयेथाइन कार्माजिन 100 एमजी (डीईसी) है। ये दवा फाइलेरिया व हाइड्रोसिल में मरीजों को दी जाती है। इस दवा की आपूर्ति फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत अस्पतालों में की गई थी। ये दवा एक्सपायर भी नहीं हुई है। दवा पर मई 2023 की एक्सपायरी डेट प्रिंट है।

वहीं कूड़े में ओआरएस पाउडर के पैकेट भी मिले हैं। इसे उल्टी-दस्त से पीड़ित मरीजों को घोलकर पिलाया जाता है। इसके अलावा तमाम दवाएं अधजली थीं, जो पढ़ने में नहीं आ रही थीं। एक चिकित्सक के मुताबिक उसके कंपोजिशन के मुताबिक ये एंटी बॉयोटिक दवाएं हैं। इन दवाओं को सर्दी जुकाम, बुखार में दिया जाता है। दवा किसने और क्यों फेंकी, इसका पता नहीं चल सका है।सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजेश ने कहा कि नवीन पीएचसी वलीपुर में कूड़े के ढेर में सरकारी दवाएं फेंके जाने का मामला प्रकाश में आया है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। जो दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

# फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम पर सवाल
पीएचसी, सीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक पहुंचने वाले मरीज आए दिन इस बात की शिकायत करते हैं कि उन्हें दवाएं नहीं दी गईं, या फिर चिकित्सक ने बाहर की दवा लिख दी है। आखिर ये दवाएं मरीजों को क्यों नहीं दी गईं। उससे भी बड़ा सवाल यह है कि सरकार ने फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम चला रखा था। उसके लिए अस्पतालों में दवाएं भेजी गई थीं। दवाओं को घर-घर जाकर लोगों में वितरित किया जाना था। इन दवाओं को फेंके जाने से फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों की गंभीरता की पोल भी खुल गई है।



















