किसानों की लागत निकालना मुश्किल,आलू की कीमतों में भारी गिरावट
नई दिल्ली।
तहलका 24×7
देश के प्रमुख आलू उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश,पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में आलू की कीमतों में लगातार गिरावट से किसानों की चिंता बढ़ गई है। मंडियों में मिल रहे कम दामों के कारण किसानों के लिए उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार जून 2026 में पिछले वर्ष की तुलना में आलू की औसत थोक कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

सबसे अधिक गिरावट उत्तर प्रदेश में देखने को मिली, जहां कीमतों में 54.8 प्रतिशत की कमी आई है।वहीं पश्चिम बंगाल में 40.2 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 25.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।राज्यवार औसत थोक कीमतों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश में आलू का औसत भाव 524.85 रुपये प्रति क्विंटल रहा। पश्चिम बंगाल में यह 807.51 रुपये प्रति क्विंटल तथा मध्य प्रदेश में 724.87 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।तीनों राज्यों में आलू के भाव एक हजार रुपये प्रति क्विंटल से नीचे बने हुए हैं।

किसानों का कहना है कि बीज,खाद,सिंचाई,मजदूरी और भंडारण की बढ़ती लागत के बीच मौजूदा बाजार मूल्य उन्हें घाटे की ओर धकेल रहा है।कई किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष कई राज्यों में आलू का उत्पादन बढ़ने से बाजार में आपूर्ति अधिक हो गई है,जबकि मांग अपेक्षाकृत कम रहने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

यदि जल्द ही बाजार में सुधार नहीं हुआ तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
किसान संगठनों ने सरकार से बाजार हस्तक्षेप,भंडारण सहायता तथा उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है,ताकि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिल सके।


















