जौनपुर : अंधेरे में राष्ट्रीय ध्वज फहराना बना चर्चा विषय, प्रशासन व जनप्रतिनिधि मौन
# भारत की पहली गदर क्रांति का गवाह शहीद स्मारक सेनापुर
केराकत।
विनोद कुमार
तहलका 24×7
क्षेत्र अंतर्गत सेनापुर गांव में जंग-ए-आजादी की लड़ाई में दीवान-ए-खास रहे अमर शहीदों की याद में बने शहीद स्तम्भ और फहराता राष्ट्रीय ध्वज इतिहास के पन्नों में चार चांद लगा रहा है वहीं रात्रि अंधेरे में ध्वज का फहराना ग्रामीणों के मन पर बोझ सा लगता है।गौरतलब है वर्ष 1857ई में भारत की पहली गदर क्रांति मे भारत को आजाद कराने में डोभी क्षेत्र के रणबांकुरों ने बढ़- चढ़कर हिस्सा लिया जिसका गवाह सेनापुर गॉव में बना शहीद स्मारक हैं।

डोभी की लड़ाई भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाईयों में से एक है जहाँ एक पेड़ पर एक ही दिन एक ही समय 23 रणबांकुरों को फांसी दी गयी थी पर भारतीय इतिहास के पन्नों में अतीत बनकर रह गई हैं। 23 शहीदों में से सिर्फ 15शहीदों के नाम का उल्लेख स्तम्भ पर लगे शिलापट्ट पर अंकित है वही 8 शहीदों के नाम इतिहास के पन्ने में गुम हो गये। शहीद स्तम्भ पर लगे शिलापट्ट पर यदुवीर सिंह, दयाल सिंह, शिवव्रत सिंह, जय मंगल सिंह, रामदुलार सिंह, अभिलाष सिंह, देवकी सिंह, जगलाल सिंह, ठाकुर सिंह, शिवराम अहीर, किशुन अहीर, माधव सिंह, विश्वेसर सिंह, रामभरोस सिंह एवं छांगुर सिंह क्रांतिकारियों का नाम अंकित है।



















