जौनपुर : संविधान का सम्मान मतलब देश के वीर सपूतों का सम्मान- नीतू सिंह

जौनपुर : संविधान का सम्मान मतलब देश के वीर सपूतों का सम्मान- नीतू सिंह

शाहगंज।
राजकुमार अश्क
तहलका 24×7
               लाल बहादुर शास्त्री मार्ग पर स्थित प्राइमरी विद्यालय की प्रधानाचार्य नीतू सिंह ने सरकार द्वारा निर्देशित कोरोना गाइडलाइन का पालन करते अपने सहायक अध्यापकों के साथ गणतंत्र दिवस की 73वीं वर्षगाँठ पर झंडारोहण करने के पश्चात अपने उद्बोधन में कहा कि जिस समय हमारे देश को अंग्रेजी दासता से मुक्ति मिली थी उस समय हमारा अपना कोई कानून नहीं था हम अंग्रेजी सरकार द्वारा थोपे गयें कानून के अनुसार ही अपने देश की शासन प्रणाली को चला रहे थे जो एक तरह से हमें गुलामी का ही एहसास कराता रहता था, मगर हमारे कानूनविदो और नेताओं ने उस दासता को भी तोड़ने का प्रण लिया और 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन का भगीरथ प्रयास किया।

26 जनवरी 1950 को संविधान रूप खड्ग से उस बेड़ी को तोड़ दिया जो हमे आजाद होकर भी गुलाम होने का एहसास कराती रहती थी। हमारे संविधान को बनाने में बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर, डॉ राजेन्द्र प्रसाद जैसे ज्ञानियों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। यह संविधान हमें बहुत से ऐसे अधिकार देता है जिससे हमारा जीवन सुगम हो जाता है मगर दूसरी तरफ कुछ कर्तव्य से भी संविधान हमें बांध देता है। यह दुनिया का एक मात्र लिखित और सबसे बड़ा संविधान है जो कि भारत जैसे विशाल देश को कानून के एक सूत्र में बांधकर सब के लिए एक समान कानूनी अधिकार प्रदान करता है। इस अवसर पर विद्यालय की सहायक अध्यापिका ममता, प्रीति अग्रहरि, सीमा वर्मा, रचना जायसवाल, प्रिया पाण्डेय, पारूल पाण्डेय, शिक्षा मित्र ओम् प्रकाश यादव, एवं गीता पाण्डेय उपस्थित रही।
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