अदालत में पलटे गवाह,कातिलाना हमले के मामले में अधिवक्ता समेत तीन बरी
जौनपुर।
एखलाक खान
तहलका 24×7
बक्सा थाना क्षेत्र के सवंसा गांव में वर्ष 2011 में दर्ज मारपीट और कातिलाना हमले के बहुचर्चित मामले में अपर सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र प्रताप यादव की अदालत ने साक्ष्य के अभाव में दीवानी न्यायालय के अधिवक्ता आशुतोष उपाध्याय समेत तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।मामले के एक आरोपी राकेश उपाध्याय की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है।

अभियोजन के अनुसार,24 अक्टूबर 2011 की सुबह पुरानी जमीनी रंजिश को लेकर विवादित पेड़ काटने के दौरान विवाद हुआ था।शिकायतकर्ता चंद्रमणि उपाध्याय का आरोप था कि आशुतोष उपाध्याय,राकेश,लवकुश और अजय ने घर में घुसकर कुल्हाड़ी व लाठी-डंडों से हमला किया,जिसमें तत्कालीन ग्राम प्रधान रामजी उपाध्याय,उनकी पत्नी शिवकुमारी,भाई इंद्रमणि,भाभी संध्या तथा भतीजा नीरज घायल हो गए थे।

पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था।सुनवाई के दौरान मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब पूर्व प्रधान रामजी उपाध्याय को छोड़कर अन्य सभी प्रत्यक्षदर्शी गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए।अदालत में गवाहों ने कहा कि लोग पेड़ की डाल काटते समय उसी से टकराकर घायल हुए थे तथा आरोपियों द्वारा न तो मारपीट की गई और न ही किसी प्रकार की गाली-गलौज या धमकी दी गई।सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष घायल व्यक्तियों के चिकित्सकीय साक्ष्य को भी प्रभावी ढंग से न्यायालय में साबित नहीं कर सका।

वहीं,पूर्व प्रधान रामजी उपाध्याय के बयान का भी अन्य गवाहों ने समर्थन नहीं किया।इन परिस्थितियों में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त न मानते हुए आरोपियों को संदेह का लाभ दिया और अधिवक्ता आशुतोष उपाध्याय,लवकुश तथा अजय को दोषमुक्त कर दिया।राकेश उपाध्याय के विरुद्ध कार्यवाही उनकी मृत्यु के कारण पहले ही समाप्त हो चुकी थी।मामला गवाहों के अदालत में पक्षद्रोही हो जाने के कारण अभियोजन के कमजोर पड़ने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।






