ऑपरेशन यमराज: एक पुलिस वाला झोलाछाप चिकित्सक के ठीहे पर हलाल हो गया!
# जौनपुर का नईगंज इलाका है झोलाछाप का गढ़, यहां एक इलाज की दुकान में तीन दिन से भर्ती था हृदयाघात की चपेट में आया यूपी पुलिस का जवान, चार दर्जन इंजेक्शन और एक दर्जन से ज्यादा बोतल चढ़ाया गया, अंतिम स्थिति देख रेफर कर दिया।
कैलाश सिंह-
विशेष संवाददाता
वाराणसी/ जौनपुर।
तहलका 24×7 न्यूज. उत्तर प्रदेश के पश्चिमी इलाके की तर्ज पर पूर्वांचल के जिलों में झोलाछाप चिकित्सकों की भरमार है। इनका मुख्यालय वाराणसी है। एमबीबीएस, एमडी की नकली डिग्री के साथ नकली दवाओं में प्रतिबंधित और एक्सपायरी में भी फ़र्क करना जटिल है, लेकिन यह सबकुछ जौनपुर में होता है। यहां कथित बड़े निजी अस्पतालों की तर्ज पर झोलाछाप भी अपने मेडिकल स्टोर पर खुद की एमआरपी वाली दवाएं धड़ल्ले से बेचते हैं। इसके लिए वह तीमारदार को हाथ से लिखी पर्ची पकड़ाते हैं जो उन्हीं के मेडिकल स्टोर पर लेनी पड़ती है।
मरीज को कौन सी दवा और इंजेक्शन आदि दिए जा रहे हैं यह किसी को पता नहीं लगने देते हैं। उनके इलाज वाली फाइल अपनी गिरफ्त से बाहर तब भी नहीं जाने देते जब मरीज को रेफर किया जाता है। उसके लिए डिस्चार्ज का पर्चा अलग से बनाकर थमा देते हैं। यानी दूसरे अस्पताल में जाने पर जब वहां का डॉक्टर मरीज की ‘केस हिस्ट्री’ पूछता है तब तीमारदार गुजरे वक़्त की घटना से लेकर इंजेक्शन, ग्लूकोज जैसी बॉटल, और दवाओं के पत्ते की अनुमानित गिनती बताता है।
इसी तरह की घटना जौनपुर के नईगंज की एक इलाज वाली दुकान में टीवी सीरियल की तरह तीन दिन में घटी, जिसमें एक यूपी पुलिस के जवान ने 11 जनवरी की शाम सात बजे दम तोड़ दिया। मरीज भर्ती हुआ झोलाछाप के यहां और मौत जिला अस्पताल में हुई। कथित हार्ट अटैक से दम तोड़ने वाले 47 वर्षीय सिपाही दिग्विजय पांडेय पुत्र स्व. रामनाथ पांडेय देवरिया जिले के ग्राम चौंधिया थाना खुखुंदू के निवासी बताए जाते हैं। उनकी तैनाती जौनपुर में थी। उन्हें हार्ट अटैक नौ जनवरी की दोपहर बाद हुआ।
पत्नी ने करीब आठ वर्षीय अपने पुत्र के साथ नईगंज के उसी कथित एमडी फिजिशियन के अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया था। उनके बेटे ने ‘तहलका न्यूज नेटवर्क’ की टीम को बताया कि डॉक्टर ने बीमारी नहीं बताई, बस पांच दर्जन इंजेक्शन और 12 से ज्यादा बॉटल चढ़ाते रहे और अब हार्ट अटैक की बात कहते हुए पापा को दूसरे बड़े अस्पताल ले जाने को कहा। यहां से जौनपुर जंक्शन रोड पर स्थित एक पुराने फिजिशियन के पास गए तो उन्होंने जिला अस्पताल ले जाने को कहा जो उस अस्पताल के निकट है। वहां गए तो डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
यह घटना एकदम टीवी सीरियल की तरह तीन दिन परिवार के सामने चलती रही। सच तो ये है कि ऐसी दो-चार घटना हर रोज जौनपुर के नईगंज, सिपाह, सिटी स्टेशन रोड स्थित कथित निजी अस्पतालों में घटती है। ऐसे झोलाछाप चिकित्सकों को जांचने का जिम्मा जिस सरकारी डिप्टी डॉक्टर पर है वह तो ओटी सहायकों और कथित तकनीशियन को भी खोमचे में सर्जरी की छूट दिए रहते हैं। पिछले दिनों इसी ग्रेड के कथित सर्जन एक खोमचे में प्रसूता का पेट फाड़ने के दौरान का वीडियो सोशल मीडिया पर डालकर अपना प्रचार करते मिले लेकिन तत्कालीन डीएम ने सीएमओ और उनके मातहत को फटकार लगाकर कोरम पूरा कर लिए और वह खोमचे वाले कथित सर्जन ने अपनी दुकान दूसरी पटरी पर लगा ली।
किसी भी घटना के बाद कुछ दलाल पत्रकारों, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को मैनेज करके ये झोलाछाप अपनी दुकान फ़िर चालू कर लेते हैं।इस तरह की प्रक्रिया बड़ी शांति से फुटकर मेडिकल स्टोरों पर भी चलती है। नकली और प्रतिबंधित के साथ एक्सपायरी दवाओं को बेचने वाले औसतन तीन से पांच हजार रुपये हफ़्ता देकर पब्लिक से रकम लेकर भी उनकी जान के ग्राहक बने हैं। नशीली दवाओं के कारोबार में एक-एक, दो-दो प्रतिशत के हिस्सेदार जिले के बड़े सफेदपोश अफ़सरों को मिलाकर लाखों, करोड़ों पीट रहे हैं।
इस पूरे धंधे में दवाओं और दुकानों की जांच करने वाले कथित अधिकारी के पास ‘कट और हफ़्ता समय से पहुंच जाता है लेकिन वह अपने हाथ में पैसा नहीं लेता, बल्कि उसने अपने वाहन चालक को ही मुनीम बना रखा है। उसका एक ड्राईवर कथित निजी अस्पताल की नर्स से रेप में फंसा तो उससे पल्ला झाड़कर दूसरे को रख लिया। ये ड्राईवर भी शिक्षा विभाग के वाहन चालकों, परिचारकों की तरह मुनीमी करके करोड़पति की श्रेणी हासिल कर लेते हैं। बाकी विस्तृत अगली कड़ी में।
क्रमशः………