गोल्ड माफिया का कारनामा: यह डायनासोर ग्राहकों को चारा बनाकर छोटे व्यापारियों को निगलता है!
# मामला गंभीर देख एसपी ने जांच अधिकारी बदला, पौने पांच लाख के हार में ठगी के चलते कीर्तिकुंज ज्वेलर्स की तरफ घूम गई आफत, तमाम ग्राहक खरीदे गए जेवर टंच कराने में जुटे, यदि कैरेट में झोल निकला तो मुकदमों की बाढ़ नजर आएगी।
कैलाश सिंह
जौनपुर/ वाराणसी।
तहलका 24×7
जैसे मौसम में हीट व कोल्ड वेव, मानसून हो अथवा समुद्री तूफान या फिर भूकंप, यह पैकेज में एक के बाद एक लहर की तरह आफत बनकर आता है, तब प्रकृति के साथ खेलने वालों को यह ग्रास बनाता है। उसी तरह जब किसी उत्पाद में मिलावट के साथ ठगी की मुहर लगती है, तब ब्रांड की वैल्यू शेयर बाजार सरीखे जमीन से नीचे जाने लगती है। बाबा रामदेव के पतंजलि वाले उत्पाद सबसे बड़े उदाहरण हैं। ‘ज्वेलरी’ का कारोबार गुणवत्ता और विश्वास पर चलता है, जब इसमें ग्राहक का भरोसा टूटता है तब यह रेत के महल सरीखे भरभरा जाता है, वही हाल कीर्ति कुंज के साथ शुरू हो चुका है।

जौनपुर में कीर्तिकुंज ज्वेलर्स के खिलाफ शहर कोतवाली में दर्ज हुए धोखाधड़ी और धमकी के मुकदमे की श्रृंखला बढ़ने की संभावना प्रबल होती जा रही है। तमाम ग्राहक जिन्होंने इसके यहां से ज्वेलरी खरीदी है, वह भी अब टंच कराने लगे हैं। कीर्तिकुंज से हफ़्ता लेने वाले नौकरशाह और अपराधी आकाओं ने उसके लिए पैरवी करने से हाथ खींच लिए हैं। पुलिस अफसर शहर कोतवाल मिथिलेश मिश्र ने सारे ऊपरी दबाव और लाखों की रकम को दरकिनार करते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया।

चार महीने से कीर्तिकुंज ज्वेलरी शॉप पर दौड़कर थकने के बाद पीड़ित हिमांशु मिश्र की तहरीर पर मुकदमा लिखा गया तो वाराणसी समेत पूर्वांचल की सर्राफा मण्डियों में हड़कम्प मच गया। क्योंकि इसने पिछले महीने तीन दिन 50 फीसदी जीएसटी फ्री करके मेकिंग चार्ज भी मामूली रखा तो छोटे व्यापारियों को भी भारी नुकसान हुआ। इस तरह का खेल वह आयेदिन खेलता है।जौनपुर शहर कोतवाल मिथिलेश मिश्र के मुताबिक मामले की गंभीरता देख एसपी डॉ. कौषतुभ ने चार जून को विवेचक यानी जांच अधिकारी बदलकर अपराध शाखा के एक अधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंप दी है।

माना जा रहा है कि इन दिनों जनपद में चोरी, हत्याओं की बाढ़ से हलकान पुलिस अधीक्षक इस ठग को सबक सिखाकर अपने महकमें के सख्त इकबाल का संदेश देना चाहते हैं। वजह जो भी हो लेकिन, वर्षों बाद ग्राहकों और छोटे व्यापारियों के लिए डायनासोर बना यह गोल्ड माफिया कायदे से फंस गया है। इसने सिद्दीकपुर में जो वाहन एजेंसी खोली है उसमें ग्राम समाज का चकरोड और किसान की जमीन भी अपने वाहन शोरूम वाले भवन के नीचे दबा ली है। रकम की गड्डी से दबे तत्कालीन राजस्व अधिकारी तो चुप रहे लेकिन अब आरटीआई कार्यकर्ता सक्रिय हो गए हैं।

इसी तरह शहर के चाहरसू चौराहे वाले पहले ज्वेलरी शोरूम में व्यापारी अग्रवाल बंधु के भवन की छत पर इसने कब्जा कर लिया है जो आज भी दिख रहा है। तब के पुलिस अफसरों और मुख्तार, मुन्ना बजरंगी गिरोह के गुर्गों ने इसके पक्ष में अग्रवाल बंधु को धमकी देकर अपनी हफ़्ता वसूली की रकम बढ़ा ली थी, वही विरासत अब तक चली आ रही थी, लेकिन वर्तमान शहर कोतवाल श्री मिश्र ने इस राह में कंक्रीट की दीवार खड़ी कर दी है।

बीते 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर्व के मद्देनजर सोने-चांदी के रेट एक लाख का आंकड़ा पार करने को मचल रहे थे, तब कीर्तिकुंज संचालक ने गिफ्ट हैम्पर स्कीम के तहत तीन दिन 50 फीसदी जीएसटी फ्री का विज्ञापन अखबारों में दिया। जबकि किसी भी उद्यमी को जीएसटी फ्री का कोई अधिकार नहीं है, बल्कि बेचे गए उत्पाद की रसीद पर भी इसकी रकम दर्शानी पड़ती है, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया, जाहिर है रसीद भी नकली देता होगा। पेपरों में विज्ञापन देख बचत के भ्रम में इसके यहां ग्राहकों का मेला लगने लगा तो छोटे व्यापारियों से ग्राहक वही छूट मांगने लगे, मांग पूरी न होने पर धंधा चौपट होने लगा।

प्रमुख अखबारों में छपे विज्ञापन में 50 फीसदी जीएसटी फ्री के बाबत जिले के जीएसटी अधिकारी सुरेंद्र कैथल ने कहा कि इसका अधिकार तो मुझे भी नहीं है। भ्रम फैलाकर जो चाहे करे उससे विभाग का कोई लेना- देना नहीं। यहां दिलचस्प ये है कि जब ग्राहकों को खाद्यान, कपड़ों व अन्य सामान पर जीएसटी भरनी पड़ती है तो जेवर पर कैसे छूट मिलेगी? जाहिर है ज्वेलरी का जगलर नकली रसीद का खेल करता है, इससे राजस्व की भी हानि होती है। इसी तरह कपड़ों के कई शो रूम में ब्रांडेड के नाम पर ग्राहकों से नकली कपड़े पर असली दाम की वसूली हो रही है, जबकि दिया जाने वाला कपड़ा मूल ब्रांड की नकल होता है या उसमें कमी के चलते रिजेक्टेड होता है। इसकी तफ़्सील से जानकारी अगली सीरीज में मिलेगी।
क्रमशः……….








