जौनपुर : फगुआ की खुमारी में झूमें लोग, हर्षोल्लास के साथ मनाई गई होली

जौनपुर : फगुआ की खुमारी में झूमें लोग, हर्षोल्लास के साथ मनाई गई होली

बक्शा।
दीपक श्रीवास्तव
तहलका 24×7
                  बक्शा विकास खण्ड के सुजियामऊ गांव में शुक्रवार को पारंपरिक होली गीत का आयोजन किया गया। इस दौरान फगुआ गीतों व वाद्य यंत्रों की धुन पर श्रोता मन्त्र मुग्ध हो गये। जिसको सुनने के लिए दूर-दराज से पहुँचे सैकड़ों श्रोताओं पर आयोजक पूर्व ब्लॉक प्रमुख श्रीपति उपाध्याय द्वारा पुष्प वर्षा की गई।

कलाकारों ने अवधी, फगुआ, उलारा, चैता, बेलवइया, चहका, धमार आदि गीत की शानदार प्रस्तुति दी। श्रीपति उपाध्याय उर्फ भैवा के आवास पर आयोजित होली मिलन गीत में 92 वर्षीय बड़कऊ उपाध्याय द्वारा चौताल “मोहि अवध छयल दिलदारे नयन शर मारे” व कैलाश शुक्ला द्वारा चहका गीत “झोकवन बहई बयार अटरिया लम्बी छवाई द बालमवा” प्रस्तुत कर मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रख्यात गायक लालसाहब पाठक व रामआसरे तिवारी द्वारा “बालम सेजिया नहि आये सखी की बेहतरीन प्रस्तुति की। चक्रपति उपाध्याय ने धमार “चल चल अटरिया भाग पिया बरसई झमकारी बदरिया” तथा धर्मदत्त उपाध्याय द्वारा मोहि नीको न लागे नैहिरवा गीत गाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

इसके अलावा रामनवल शुक्ल, विदित नारायन उपाध्याय, कृष्णानन्द उपाध्याय आदि ने लुप्त हो रही लोकगीतों की बेहतरीन प्रस्तुति दी। अंत में आयोजक एवं गीतों के संरक्षण में प्रमुख योगदान करने वाले श्रीपति उपाध्याय ने आये हुए लोगो के प्रति आभार ब्यक्त करतें हुए नई पीढ़ी के लोगों से लुप्त हो रही विधा को सहेजने की जरूरत बताई। इस दौरान प्रोफेसर डॉ. आर एन त्रिपाठी व प्रख्यात चिकित्सक डॉ. अरुण कुमार मिश्र ने मौजूद लोगो से कहा कि आज लुप्त हो रही इस परंपरा के साक्षी ही नही संवाहक भी बनिये तभी लुप्त होती संस्कृतियों को बचाया जा सकता है। इस दौरान रामेश्वर त्रिपाठी, सभाजीत द्विवेदी प्रखर, डॉ. मनोज मिश्र, विद्यानंद उपाध्याय, राकेश तिवारी सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

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