बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा था आदिवासी युवक, अब शाखा प्रबंधक निलंबित, देशभर के ग्रामीण बैंकों को केंद्र की सख्त नसीहत

बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा था आदिवासी युवक,अब शाखा प्रबंधक निलंबित, देशभर के ग्रामीण बैंकों को केंद्र की सख्त नसीहत

नई दिल्ली/भुवनेश्वर। 
तहलका 24×7 
              ओडिशा के क्योंझर जिले में दो महीने पहले सामने आए उस हृदयविदारक मामले में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है,जिसमें आदिवासी युवक अपनी मृत बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंच गया था।मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था।अब संबंधित बैंक शाखा प्रबंधक को निलंबित कर दिया गया है।साथ ही केंद्र सरकार ने देश के सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को निर्देश जारी कर ग्रामीण,आदिवासी और अन्य कमजोर वर्गों के ग्राहकों के प्रति संवेदनशील एवं मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने को कहा है।
बताते चलें कि क्योंझर जिले के निवासी आदिवासी जीतू मुंडा अपनी बहन के बैंक खाते में जमा करीब 19 हजार रुपये निकालने के लिए कई बार बैंक के चक्कर लगा रहा था।उसकी बहन की मृत्यु हो चुकी थी,लेकिन आवश्यक दस्तावेजों और बैंकिंग प्रक्रिया की जानकारी के अभाव में वह रकम नहीं निकाल पा रहा था।निराश होकर उसने बहन के दफनाए गए अवशेषों को निकाल लिया और कंकाल लेकर बैंक पहुंच गया ताकि उसकी मौत का प्रमाण दे सके।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया था।अब घटना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित ओडिशा ग्रामीण बैंक ने अपनी मल्लीपोसी शाखा के प्रबंधक को निलंबित कर दिया है।बैंक प्रबंधन ने माना कि नियमों का पालन आवश्यक है,लेकिन ग्राहकों के साथ संवाद और व्यवहार में संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है।वित्त मंत्रालय के अधीन वित्तीय सेवा विभाग ने देश के सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को सलाह जारी की।इसमें कहा गया है कि बैंक अधिकारी ग्रामीण,आदिवासी और अन्य कमजोर वर्गों के ग्राहकों के मामलों में सहानुभूतिपूर्ण, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाएं।
साथ ही प्रक्रियाओं को स्पष्ट रुप से समझाएं ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।मामले के तूल पकड़ने के बाद स्थानीय प्रशासन ने हस्तक्षेप किया।आवश्यक दस्तावेज तैयार कराए गए और मृत महिला के खाते में जमा 19,402 रुपये कानूनी उत्तराधिकारियों को जारी कर दिए गए।घटना पर व्यापक राजनीतिक प्रतिक्रिया हुई थी।वरिष्ठ नेताओं ने इसे व्यवस्था की संवेदनहीनता का उदाहरण बताते हुए दूरदराज के आदिवासी इलाकों में बैंकिंग सेवाओं को अधिक मानवीय बनाने की मांग की थी।इसके बाद केंद्र सरकार ने सभी ग्रामीण बैंकों के लिए परामर्श जारी किया।
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