लखनऊ अग्निकांड में नया मोड़: निलंबित फायर अधिकारी का वीडियो वायरल, सीएफओ पर फोड़ा ठीकरा

लखनऊ अग्निकांड में नया मोड़: निलंबित फायर अधिकारी का वीडियो वायरल,सीएफओ पर फोड़ा ठीकरा

लखनऊ। 
विजय आनंद वर्मा 
तहलका 24×7
              अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासनिक कार्रवाई के घेरे में आए फायर स्टेशन सेकेंड ऑफिसर कमलेंद्र सिंह ने अब पूरे मामले में नया और सनसनीखेज मोड़ ला दिया है।लापरवाही के आरोप में निलंबित किए गए कमलेंद्र सिंह ने एक वीडियो बयान जारी कर अपने निलंबन को अन्यायपूर्ण बताते हुए सीधे चीफ फायर ऑफिसर को हादसे और विभागीय विफलता का जिम्मेदार ठहराया है।
साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।निलंबित अधिकारी द्वारा जारी वीडियो और मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के सामने आने के बाद दमकल विभाग और शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है।अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर नए सिरे से बहस शुरु हो गई है।मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में कमलेंद्र सिंह ने कहा कि मामले में छोटे अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है,जबकि वास्तविक जिम्मेदारी उच्च अधिकारियों की है।
उन्होंने लिखा कि फायर विभाग में भवनों को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने अथवा निरस्त करने का अधिकार पूरी तरह चीफ फायर ऑफिसर के पास होता है।पत्र में उन्होंने कहा,”मेरा कार्यक्षेत्र सीमित है।किसी भवन को एनओसी देने या न देने का निर्णय मेरे स्तर पर नहीं लिया जाता।जब सभी अधिकार सीएफओ के पास हैं तो जवाबदेही भी उन्हीं की तय होनी चाहिए।”कमलेंद्र सिंह ने दमकल विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि अलीगंज में आग लगने की सूचना मिलने के बाद दमकल की गाड़ियां समय पर मौके पर नहीं पहुंच सकीं,जिससे आग ने विकराल रुप धारण कर लिया।
उनका कहना है कि यह केवल किसी एक अधिकारी की नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता है।उन्होंने दावा किया कि मौके पर संसाधनों के समुचित प्रबंधन और समय पर प्रतिक्रिया की जिम्मेदारी भी उच्च अधिकारियों की होती है।वीडियो संदेश में कमलेंद्र सिंह ने सीएम योगी आदित्यनाथ से अपील करते हुए कहा कि उनके खिलाफ की गई निलंबन की कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।उन्होंने मांग की कि जिम्मेदारी तय करते समय केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को निशाना न बनाया जाए,बल्कि निर्णय लेने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो।
निलंबित अधिकारी के आरोपों के सार्वजनिक होने के बाद शासन और दमकल विभाग में खलबली मच गई है। सूत्रों के अनुसार,विभागीय स्तर पर मामले की समीक्षा की जा रही है।वहीं,अधिकारियों की जवाबदेही और फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठने लगे हैं।गौरतलब है कि अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद फायर सेफ्टी मानकों और विभागीय निगरानी को लेकर सरकार पहले ही सख्त रुख अपना चुकी है।
ऐसे में निलंबित अधिकारी के आरोपों ने पूरे मामले को नया राजनीतिक और प्रशासनिक आयाम दे दिया है।
कमलेंद्र सिंह के वीडियो और पत्र के सामने आने के बाद यह मामला केवल अग्निकांड तक सीमित नहीं रह गया है,बल्कि फायर विभाग के भीतर जवाबदेही और अधिकारों के बंटवारे पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।अब देखना होगा कि शासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और जांच में किन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होती है।
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