भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम तय, जल्द होगी घोषणा!
# आखिर वह घड़ी आ गई जिसका था भाजपाजनों को एक साल से इंतज़ार, अध्यक्ष के नाम पर अनुमोदन 18 अप्रैल से बेंगलुरु में होने वाली भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा बैठक में किया जाएगा।
कैलाश सिंह
लखनऊ, दिल्ली।
तहलका 24×7
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा बीते लोकसभा चुनाव के पूर्व से एक्सटेंशन पर हैं।नये अध्यक्ष के नाम को लेकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शीर्ष नेतृत्व के बीच सहमति न बन पाने के कारण नियुक्ति का निर्णय अधर में लटका रहा, लेकिन अब जो संकेत मिल रहे हैं उनके मुताबिक नाम ऐसा तय हुआ है जिसे निर्विरोध कहना ज्यादा श्रेयस्कर होगा। इस नाम पर दोनों संगठनों में किसी को ऐतराज नहीं है। यह नाम चर्चाओं से बाहर रहा हो सकता है लेकिन इस नाम से दोनों संगठनों के लोग बखूबी परिचित हैं।

इस नाम के व्यक्ति का कार्य कौशल यह है कि दोनों संगठनों के बीच बेहतरीन तालमेल रखने में माहिर है।इस नाम की घोषणा राम नवमी तक या उसके तुरन्त बाद कभी भी हो जाएगी।संघ और भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से जो खबरें मिल रही हैं, उसके मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की घोषणा के बाद केंद्रीय मन्त्रिमण्डल में भी फेरबदल होगा।इतना ही नहीं, भाजपा में उत्तर प्रदेश के नये अध्यक्ष की भी घोषणा के साथ यूपी के मन्त्रिमण्डल में भी फेरबदल होना तय माना जा रहा है।

विदित हो कि भाजपा के संगठन में जब भी बड़े स्तर पर फेरबदल होता है तब कुछ लोग संगठन से सरकार के मन्त्रिमण्डल में भेजे जाते हैं और सरकार के मन्त्रिमण्डल से निकलने वाले संगठन की सेवा के लिए उतारे जाते हैं।
अब केंद्रीय और उत्तर प्रदेश की सरकारों एवं संगठन के बीच ऐसा ही होने जा रहा है। दोनों जगह के अध्यक्ष नये होंगे लेकिन जिनके नाम घोषित होंगे उनके चेहरों से संघ और पार्टी के कार्यकर्ता भी भलीभांति परिचित होंगे। उनकी कार्यशैली से भी किसी के ऐतराज की गुंजाइश नहीं रहेगी।

एक नज़र उन नामों पर भी डालिए जो लगतार सोशल मीडिया की सुर्खियां बनते रहे हैं, इनमें पहला नाम संजय जोशी का है जिन्हें संगठन संचालन का सबसे बेहतरीन अनुभव से कोई इनकार नहीं कर सकता है।लेकिन इन्हें भाजपा का शीर्ष नेतृत्व बिल्कुल पसन्द नहीं कर पा रहा है। दूसरे नामों में बसुन्धरा राजे सिंधिया, नितिन गडकरी, देवेंद्र फडणवीस, योगी आदित्यनाथ, यूपी सरकर में अंतरकलह के दौरान केशव मौर्या का नाम भी दिल्ली की पसन्द पर कयास के तौर पर उछला था, उसी समय यूपी भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का नाम भी दिल्ली के लिए हल्की चर्चा में आया था।

शुरूआती दौर में हरियाणा के पूर्व मुख्यमन्त्री मनोहर लाल खट्टर का नाम भी एक बार फ्लैश हुआ लेकिन बाद में चर्चाओं से बाहर हो गया, फ़िर भी इनके संगठन कौशल, बेहतरीन तालमेल को लेकर यह विवादस्पद नहीं हैं।मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान का नाम काफी दिनों तक मीडिया की टीआरपी का हिस्सा रहा।इसके अलावा भी कुछ नाम आते और जाते रहे, लेकिन वह संघ और भाजपा नेतृत्व की संयुक्त पसन्द नहीं बन पाए। अब इनमें से कम चर्चित हुआ नाम घोषित हो जाए तो हैरत नहीं होनी चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक जल्द ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर दोनों संगठनों के कार्यकर्ताओं तक के लिए चिरपरिचित चेहरा सामने आयेगा, तब लोग यह कहते सुने जाएंगे कि ‘अरे इनपर कैसे ध्यान में नहीं आया, नाम घोषित होते ही बधाई देने वालों का हुजूम का रुख बदल जाएगा।चूंकि नाम तय हो चुका है, इसलिए घोषणा को लेकर उल्टी गिनती शुरू हो गई है, बस इंतजार कीजिए।
















