भू- माफिया एपिसोड 3: फिर डराने लगी है गोमती, गंगा का मिल रहा सहयोग

भू- माफिया एपिसोड 3: फिर डराने लगी है गोमती, गंगा का मिल रहा सहयोग

# गंगा की बाढ़ से गोमती नदी फिर मुड़ी पीछे, शहर के गोपी घाट पर चढ़ा पानी, हथिया नक्षत्र ने दशकों पुराना जलवा दिखाया तो जल प्रलय की चपेट में होगा जौनपुर शहर का अधिकतर इलाका।

कैलाश सिंह
विशेष संवाददाता
लखनऊ/ जौनपुर।
तहलका 24×7                                                            उत्तर प्रदेश में ‘गोमती’ ही ऐसी नदी है जो पीलीभीत से वाराणसी तक के अपने सफर में राजधानी लखनऊ और जौनपुर के बीच शहरों से गुजरी है।बनारस के कैथी स्थित मारकंडे महादेव के पास जब गंगा में जल सैलाब आता है तब गोमती नदी का पानी जल प्रलय बनकर जौनपुर की तरफ लौटता है। इस साल अगस्त से लेकर सितम्बर में अब तक दो बार वह यहां के बाशिंदों को डरा चुकी है।रहा सवाल शहर में बाढ़ का तो इसे सितम्बर महीने के हथिया नक्षत्र वाली बारिश से सराबोर नाले डुबोने के लिए काफी होते हैं।

दरअसल चार दशक पूर्व वर्ष 1978-80 में जो जल प्रलय जौनपुर में आया और हफ़्तों जमा रहा, उसका प्रमुख कारण गंगा में बाढ़ से लौटा गोमती का पानी ही नहीं था, बल्कि निरंतर हो रही हथिया नक्षत्र वाली बारिश की भी अहम भूमिका थी। तब चांदमारी, वाजिदपुर से लेकर आज के जेसीज चौराहा तक झील थी।इसके बाद खुले क्षेत्र से निकला नाला गोमती में पानी को ड्रेन करता था। बाद में अवैध तरीके से विकसित होते शहर के ओलनगंज तक जेसीज और कचहरी मार्ग पर बने नाले की पुलिया को भू-माफिया ने प्रशासन की मदद से जमीन में दफन कर दिया।

इसका दिलचस्प पहलू ये रहा कि तभी से बारिश की रफ्तार भी कम होती गई और जमीनों के लोभी भू-माफिया कबर बिज्जू सरीखे बढ़ते गए। जिले के नौकरशाहों ने झील को ग्रीनलैंड, पार्क और खुला स्थान के नाम से सरकारी दस्तावेज में दर्ज कर उसके बनते गए मालिकानों को किसान बना दिया, यह दीगर है कि यहां कभी खेती नहीं हुई लेकिन कंक्रीट के जंगल बढ़ते गए। इसी दौरान सई नदी के उत्तरी छोर के इलाकों से निकले भैंसा नाले की हत्या वजिदपुर में कर दी गई। चांदमारी इलाके का बहुंमंजिला सिटी टावर तो भैंसा नाले पर ही बना है।

इसके बाद जेसीज चौराहे के निकट एक माननीय व कुछ अन्य कथित व्यापारियों ने उसे दबा दिया।इसी नाले की दूसरी शाखा को सिपाह बाजार व पुलिस चौकी से आगे रेलवे क्रासिंग के बाद हाल ही में एक होटल बना तो नाले को ही घुमा कर नाली बना दिया गया। क्रासिंग के नीचे वाली सड़क के दक्षिणी छोर पर होटल संचालक ने बड़ा वाला जेनरेटर नाले के मुहाने पर रख दिया। इस नाले का पानी राजा के पोखरा नाम से खाली उबड़-खाबड़ जमीन पर फैलता था।

यहां जल भराव के बाद उसी नाले से पानी गोमती में निकल जाता था, लेकिन उस भूमि को भी इन भू-माफिया ने रंगारंग स्थल, मैरेज लान, व्यावसायिक ठिकाने में तब्दील कर दिया। कभी यहां से दिन में गुजरने से भी लोग डरते थे, अब यह इलाका दिन में धंधे चरम पर और रातभर गुलजार रहता है। यह कथित विकास प्रशासन और खासकर मास्टर प्लान विभाग की मेहरबानी का नतीजा है।

क्रमशः………

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