131वां संविधान संशोधन विधेयक: महिला आरक्षण लागू करने की कोशिश को झटका,लोकसभा में नहीं मिला विशेष बहुमत
नई दिल्ली।
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संसद में पेश किया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में पारित नहीं हो सका।सरकार इस विधेयक के माध्यम से महिला आरक्षण को शीघ्र लागू करने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया को तेज करना चाहती थी,लेकिन संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो तिहाई बहुमत नहीं मिलने से यह विधेयक गिर गया।विधेयक में लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था।

इनमें 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित करने की व्यवस्था की गई थी।साथ ही, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कराकर महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता तैयार करने का प्रस्ताव भी शामिल था।106वें संविधान संशोधन(नारी शक्ति वंदन अधिनियम)के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है।हालांकि, इसकी प्रभावी शुरुआत परिसीमन और सीटों के पुनर्निर्धारण के बाद ही होनी थी।131वां संशोधन इसी प्रक्रिया को तेज करने का प्रयास माना गया।

सरकार का तर्क था कि बढ़ती आबादी के अनुरुप लोकसभा में प्रतिनिधित्व बढ़ाना समय की आवश्यकता है।साथ ही महिलाओं को आरक्षण का लाभ जल्द से जल्द दिलाने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया में देरी समाप्त करना जरुरी है।वहीं विपक्षी दलों ने 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन का विरोध किया। उनका कहना था कि इससे कुछ राज्यों,विशेषकर दक्षिण भारत के राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।विपक्ष ने पहले नई जनगणना कराने और उसके बाद परिसीमन की मांग की।

संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए लोकसभा में विशेष बहुमत आवश्यक होता है।मतदान के दौरान विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े,जबकि 230 सांसदों ने विरोध में मतदान किया।आवश्यक दो-तिहाई बहुमत यानी 352 मत नहीं मिलने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका।इसके बाद सरकार ने इससे जुड़े अन्य विधेयकों को भी आगे नहीं बढ़ाया। फिलहाल विधेयक के पारित न होने से महिला आरक्षण को शीघ्र लागू करने की सरकार की योजना को झटका लगा है।अब यदि सरकार इस दिशा में आगे बढ़ना चाहती है तो उसे नया विधेयक लाना होगा या व्यापक राजनीतिक सहमति बनानी होगी,ताकि संविधान संशोधन के लिए आवश्यक विशेष बहुमत हासिल किया जा सके।


















