उसे अंतिम सांस तक जेल में रखा जाए

उसे अंतिम सांस तक जेल में रखा जाए

# सुप्रीम कोर्ट ने हत्यारे पिता की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला                          

नई दिल्ली।
तहलका 24×7
              सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही दो नाबालिग बच्चों की हत्या के आरोपी व्यक्ति की मौत की सजा को बिना किसी छूट के आजीवन कारावास में बदल दिया। कोर्ट ने व्यक्ति के आपराधिक पृष्ठभूमि की कमी और अन्य परिस्थितियों का हवाला देते हुए यह फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक बच्चे के जीवन में उसके माता-पिता का महत्वपूर्ण स्थान होता है।
खासकर जीवन के शुरूआती सालों में बच्चों के लिए माता-पिता से प्यार, पालन-पोषण और कभी-कभी अनुशासन का मार्गदर्शन करने की अपेक्षा की जाती है। कोर्ट ने 16 जून 2010 को अपने दो बच्चों की हत्या के लिए एक शख्स को फांसी की सजा माफ करते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए यह आदेश दिया कि भगवान की तरफ से दी गई उसकी अंतिम सांस तक उसे जेल में रहना होगा।
दोषी एक राष्ट्रीयकृत बैंक का मैनेजर था। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह फैसला सुनाया।न्यायमूर्ति करोल ने कहा कि भारत की शास्त्रीय परंपराओं में माता-पिता को उच्च स्थान पर रखा गया है। माता-पिता के शब्द ईश्वर के शब्द के बराबर हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि यह सच है कि आधुनिक समय में हम ऐसी तुलना करने से बचते हैं। फिर भी यह नहीं कहा जा सकता है कि माता-पिता के प्यार, स्नेह और देखभाल की अनिवार्यता, महत्व और इच्छा को किसी भी तरह से कम कर दिया गया है।
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Tahalka24x7
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