कानपुर में गद्दे के कारखाने में लगी भीषण आग से मची अफरा-तफरी
# दमकल की दो दर्जन गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत से पाया आग पर काबू
कानपुर/लखनऊ।
विजय आनंद वर्मा
तहलका 24×7
कानपुर के जूही ओ ब्लॉक में अवैध रूप से चल रहे गद्दे के कारखाने में बुधवार को आग लग गई। छत पर रखी कपड़े की कतरन में लगी आग ने धीरे-धीरे तीसरी फिर दूसरी मंजिल को चपेट में ले लिया। दमकल की 24 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा सकीं। पुलिस की जांच में प्रथम दृष्टया कारखाना अवैध रूप से चल रहा था।

वहीं घटना के बाद मकानझ मालिका व कारखाना मालिक मौके से भाग निकले। दलेलपुरवा निवासी मोहम्मद सूफियान की ओ ब्लॉक जूही में तीन मंजिला इमारत है। जिसमें भूतल में कांच का गोदाम है। पहली से तीसरी मंजिल तक सिविल लाइंस निवासी मोहम्मद इकबाल का गद्दे का कारखाना है। वहां रजाई, गद्दे व अन्य कपड़े का सामान बनता था।

दिवाली की छुट्टी के चलते कारखाना सोमवार से बंद था। बुधवार को इकबाल का भाई शाद पहली मंजिल में अकेले बैठा था। तभी शाम करीब सवा चार बजे अचानक छत पर पड़ी कतरन में आग लग गई। देखते ही देखते आग ने तीसरी मंजिल को फिर दूसरी मंजिल को अपनी चपेट में ले लिया। किदवई नगर, फजलगंज, जाजमऊ, मीरपुर, लाटूश रोड फायर स्टेशन की गाड़ियों ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा सके। आग से लाखों का नुकसान बताया जा रहा है।

एसीपी बाबूपुरवा आलोक सिंह ने बताया कि आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। फैक्ट्री अवैध रूप से चल रही थी या नहीं इसकी भी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। मौके पर से कोई मिला नहीं है। कारखाने में आग बुझाने के उपकरण भी नहीं थे।

# घरों से बाहर भागे लोग, सिलिंडर भी निकाले
आग का विकराल रूप देख आस पड़ोस के लोग भी डर गए। इमारत की बायीं तरफ रहने वाले अनिल मौर्या की पानी की टंकी आग लगने से जल गई। डर के मारे पूरा परिवार घर के बाहर आ गया। वहीं, दायीं तरफ रहने वाले संतोष कुमार भी पूरे परिवार के साथ घर के बाहर आ गए और अंदर रखे गैस सिलिंडर भी बाहर निकाल लाए ताकि आग लगने पर कोई बड़ा हादसा न हो सके। दोनों के घरों की दीवारें भी आग से धंधक उठीं। फायर कर्मियों ने आस पड़ोस की छतों में चढ़कर पानी की बौछार मारकर आग पर काबू पाया।

# काले धूंए से घुटने लगा दम, छोड़ा इलाका
करीब एक किलोमीटर के दायरे में काला धुआं छा गया जिससे कि बुजुर्गों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। आनन-फानन कई लोगों को इलाका मजबूरी में छोड़ना पड़ा।


















