कैकेई को दो वर और राम वनगमन की लीला देख श्रोता हुए भावविभोर

कैकेई को दो वर और राम वनगमन की लीला देख श्रोता हुए भावविभोर

# श्रीराम के जयकारों से गुंजायमान रहा मंचन स्थल

शाहगंज, जौनपुर। 
एखलाक खान
तहलका 24×7
               नगर की ऐतिहासिक श्रीराम लीला के बीस दिवसीय मंचन के क्रम में शुक्रवार को देवासुर संग्राम, राम-कौशल्या संवाद, राम-सीता संवाद, लक्ष्मण-सुमित्रा संवाद, राम वनगमन, तमसा निवास एवं श्रृंगवेरपुर निवास की लीलाओं का मनोहारी मंचन हुआ।
गांधीनगर कलेक्टरगंज स्थित रामलीला मंच पर वृंदावन की आदर्श रासेश्वरी रामलीला मंडली ने तीसरे दिन का लीला मंचन प्रस्तुत किया। प्रारंभ में भक्तों ने रामदरबार की भव्य आरती की।
इसके बाद मंच पर कैकेई के दो वर मांगने और राम वनगमन के प्रसंग ने वातावरण को भावुक बना दिया। लीला में दिखाया गया कि कैकेई के वचनों से राजा दशरथ धर्मसंकट में पड़ गए। पुत्रमोह और रघुकुल की रीति के बीच उनकी मनोव्यथा ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं।श्रीराम के वनगमन पर पूरी अयोध्या शोक में डूब गई।
मुनिवेष में राम, सीता और लक्ष्मण जब तमसा तट पर पहुंचे तो भारी जनसमूह उनके साथ था। श्रीराम ने अयोध्यावासियों को सुलाकर चुपचाप श्रृंगवेरपुर की ओर प्रस्थान किया, जहां निषादराज ने उनका आत्मीय स्वागत किया। मंचन के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। लीला स्थल ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से देर रात तक गूंजता रहा।
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