जौनपुर : अस्थाई गौशाला में गोवंश कर रहे अपनी मौत का इंतजार
# गायों के जख्म को नोच कर खा रहे है कौवे, जिम्मेदार है मौन
# पशुओं को मिल रहा है चारे के नाम पर खड़ा पुआल और बजबजाता पानी
केराकत।
विनोद कुमार
तहलका 24×7
क्षेत्र अंतर्गत पेसारा गांव स्थित निराश्रित अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल की दुर्दशा की पराकाष्ठा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां प्रतिदिन किसी न किसी गोवंश की मौत होना तय रहती है। आलम यह है कि दर्जनों मरे हुए गोवंशो को दफनाने के बाद उठ रही दुर्गंध से अगल बगल से गुजरना मुश्किल है। स्थानीय लोग भी लगातार मर रहे गोवंश की हालत देखकर उन्हें आजाद करने की मिन्नते कर रहे हैं।गौशाला की बदहाली को सुन जब मौके पर मीडिया पहुंची तो गौशाला के गेट पर ताला लगा हुआ था गौशाला के अंदर जाकर देखा गया गया तो स्थिति वीभत्स थी। गौआश्रम में एक जिंदा गाय के आंख को कौआ नोच कर निकाल रहा था और जिंदा गाय छटपटा रही थी वहीं दूसरी तरफ एक और गाय के पैर में गहरी चोट लगी थी जिसे कौआ आकर उसके जख्म को गहरा करता जा रहा था।

यह दृश्य देख कर कलेजा सिहर उठा और एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते नोच रहे कौवे व जख्म को गहरा कर कौवे को वहा से भगा दिया गया। गौशाला के एक तरफ मृतक गौवंश भी पड़ा दिखा और गायों को खाने के लिए बजबजाता पानी व खड़ा पुआल रखा गया था जो गौवंशो के पहुँच से दूर रखा था जहाँ बॉस लगाया गया था। केयर टेकर भी मौके से नदारद था अगर केयर टेकर होता तो कम से कम जिंदा गायों को कौवे तो नही नोचते इस सम्बन्ध में जब ग्राम विकास अधिकारी सुरेश चंद्र से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पैसा आने वाला है। ग्राम प्रधान से अभी बात कर लेता हूँ, और केयर टेकर से भी बात करता हूँ साथ ही मैं खुद मौके पर जाकर वहाँ की स्थिति देखता हूं। बहरहाल कब और कैसे पेसारा अस्थाई गौशाला में गायों को समुचित व्यवस्था कराई जाएगी ये तो जिम्मेदार ही तय करेंगे

# जिला प्रशासन से रख रखाव के नाम पर कुछ नहीं आता है- जयहिंद रसीला
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि जयहिंद रसीला ने बताया कि कभी कभार चिकित्सक गायों को देखने आ जाते हैं इसके पहले महिला चिकित्सक थी जो हमेशा आती रहती थी और गौवंशो का बेहतर उपचार करती थी, उनके जाने के बाद डॉक्टर कभी कभी आते हैं। उन्होंने बताया कि चार लाख रुपया उधार लेकर गायों को भूसा व दाना (चोकर) खिला चुका हूं लेकिन जिला प्रशासन से रख-रखाव के नाम पर एक रुपये नही आ रहा है मैं मजबूर हो गया हूं, अगर यही स्थिति रही तो वीडियो बनाकर मुख्यमंत्री को भेज दूंगा चार पांच महीनों से चिल्ला रहा हूँ पैसे के लिए हमारा पैसा नहीं मिल रहा है हमे भी गायों की स्थित देखकर दर्द हो रहा है।अगर यही स्थिति रही तो मैं खुद गौशाला की जिम्मेदारियों को छोड़ दूंगा क्योंकि जो स्थिति इस समय उसे देखकर दिल सिहर उठता है।

















