बेशरम रंग और बायकॉट का ट्रेंड
स्पेशल डेस्क।
सौरभ स्वप्निल
तहलका 24×7
बॉलीवुड के सुपरस्टार अभिनेता शाहरुख खान और बेहद कामयाब एवं काबिल अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की फिल्म पठान और उसके गाने बेशरम रंग को लेकर मचा बवाल आजकल ट्रेंड में है। विरोध या बहिष्कार कर रहा समूह दक्षिणपंथियों का है, जिनको गाने में खास रंगों के प्रयोग से एतराज है। भगवाधारी विचारधारा वालों को लग रहा कि शाहरुख और दीपिका ने जानबूझकर इस गाने में भगवा का अपमान किया है। अल्पसंख्यक समुदाय से भी हरे रंग को लेकर आपत्ति आ चुकी है। यहां तक कि यह मुद्दा अब संसद तक पहुंच चुका है।

इसमें कोई शक नहीं समय के साथ बॉलीवुड फिल्मों में बोल्ड और सिजलिंग लुक्स के साथ बदन के हर तराश को नुमाया करते कॉस्टयूम पहनने का प्रचलन बढ़ा है। दीपिका की पिछली फिल्म गहराईयां भी इसकी मिसाल है, हालांकि तब उसका कोई विरोध नहीं हुआ। वैसे भी भारतीय दर्शकों के पोर्न या सॉफ्ट पोर्न प्रेमी होने की हकीकत कई बार साबित हो चुकी है। गूगल पर सनी लियोनी का सबसे ज्यादा बार सर्च किया जाना और स्थानीय बोलियों (खासकर भोजपुरी) के कंटेंट में भरी बेशुमार अश्लीलता भारतीय समाज खासकर हिंदी भाषी पट्टी की तल्ख सच्चाई है। ऐसे में इस समाज को बेशरम रंग गाने में भौंड़े अंगप्रदर्शन जैसे तर्क देने का नैतिक अधिकार तो नहीं ही है। साफ शब्दों में कहें तो दिक्कत अंग प्रदर्शन से नहीं है, दिक्कत तो भगवा रंग या हरे रंग के उपयोग से है।

आप अगर बॉलीवुड प्रेमी होंगे और अपने जेहन पर थोड़ा सा जोर डालेंगे तो नारंगी, भगवा और केसरिया रंग के कपड़े पहने स्टार्स के बहुत से गाने और पोज आपको याद आयेंगे। नहीं याद आ रहे हों तो सोशल मीडिया पर घूम लीजिए। धक धक गाने में माधुरी से लेकर टिप टिप बरसा पानी में कटरीना तक उस खास रंग के कॉस्टयूम में जलवे बिखेरते दिख जाएंगी। मीम्स में मुमताज से लेकर सनी लियोनी तक को भगवा रंग के कॉस्टयूम में सजे देखना हो तो सोशल मीडिया पर ज्यादा मेहनत नहीं करनी होगी। कहा जा सकता है कि विरोध की असली वजह शायद रंग भी नहीं है। वैसे भी रंगों के आधार पर विरोध शुरू हुए तो कौन सा रंग इससे बच पाएगा, कहना मुश्किल है।

ऐसे में ये समझना बहुत मुश्किल नहीं है कि दरअसल विरोध की असल वजह बॉलीवुड का हालिया बायकॉट ट्रेंड, शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण हैं। उनके खिलाफ हाल के वर्षों में एक खास वर्ग की घृणा खुलकर दिखी भी है। आर्यन का मामला रहा हो या दीपिका का जेएनयू जाना, दोनों निशाने पर रहे हैं। फिलहाल विरोध अकारण ही सही लेकिन जोरदार है। कुछ फिल्मी पंडित मान रहे हैं कि इस विवाद से गाने और फिल्म को जमकर प्रचार मिला और रिलीज के बाद उसका फायदा भी मिलेगा। इसके इतर कुछ का बीते अनुभव के आधार पर मानना है कि पठान और बॉक्स ऑफिस को इस विरोध का सीधा नुकसान उठाना पड़ सकता है। आमिर खान की लाल सिंह चढ़ा का हश्र तो याद होगा ही, जिसे भारी विरोध झेलना पड़ा था। बॉलीवुड के जानकारों को डर है कि ऐसा ही कुछ पठान के साथ भी ना हो। ऐसा हुआ तो इस इंडस्ट्री को उबरने के लिए नए फार्मूले तलाशने होंगे।

















