रकम छोटी बताकर कार्रवाई से किनारा! लंका पुलिस के रवैये पर उठे गंभीर सवाल

रकम छोटी बताकर कार्रवाई से किनारा! लंका पुलिस के रवैये पर उठे गंभीर सवाल

# पीड़ित न्याय की गुहार लेकर पहुंचा थाने,पुलिस ने आरोपी तक पहुंचने में खर्च और दूरी का गिनाया हिसाब

वाराणसी। 
तहलका 24×7 
              साइबर ठगी के मामले में न्याय की उम्मीद लेकर लंका थाने पहुंचे पीड़ित को कथित तौर पर पुलिस की कार्रवाई के बजाय आरोपी तक पहुंचने में होने वाले खर्च और दूरी का हिसाब सुनने को मिला।पीड़ित ने उच्चाधिकारियों से शिकायत कर एफआईआर दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।मामला लंका थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है।पीड़ित के अनुसार,हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट बनवाने के नाम पर उसके साथ साइबर ठगी की गई।
मामले में पीड़ित ने आईजीआरएस पर शिकायत संख्या दर्ज कराई थी।आरोप है कि 13 अगस्त की शाम करीब पांच बजे उसे लंका थाने बुलाया गया।वहां मामले की जांच कर रहे दारोगा शैलेश ने कथित तौर पर ठगी की रकम कम होने का हवाला देते हुए कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए।पीड़ित के मुताबिक,दारोगा ने कथित तौर पर कहा कि मामला छोटा है और पुलिस आरोपी की तलाश में कहां-कहां जाएगी।आरोप है कि यह भी कहा गया कि यदि आरोपी बेंगलुरु या महाराष्ट्र में बैठा है तो वहां जाने का खर्च कौन उठाएगा।
पीड़ित के अनुसार,उसे ऐसे मामले को छोड़ देना ही बेहतर होने की बात भी कही गई।हालांकि,इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।प्रकरण ने साइबर अपराधों की जांच को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।सवाल यह है कि क्या ठगी की रकम कम होने से अपराध की गंभीरता भी कम हो जाती है?साइबर अपराधों में छोटी रकम की घटनाएं भी कई बार बड़े गिरोह या संगठित नेटवर्क से जुड़ी हो सकती हैं।
ऐसे मामलों में यूपीआई ट्रांजेक्शन,बैंक खातों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच अहम मानी जाती है।पीड़ित का कहना है कि उसने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर शिकायत की है और अब उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच व एफआईआर दर्ज कराकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।फिलहाल अब देखना यह है कि उच्चाधिकारी इस शिकायत पर क्या संज्ञान लेते हैं और जांच के बाद लंका पुलिस की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की क्या सच्चाई सामने आती है।
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