सर्पदंश की शिकार महिला जिला अस्पताल रेफर
# झाड़-फूंक व अंधविश्वास ने जुलाई में ली तीन जानें
सुइथाकला, जौनपुर।
राजेश चौबे
तहलका 24×7
बारिश के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ रही हैं,लेकिन इससे भी बड़ा खतरा अंधविश्वास बनता जा रहा है।समय पर इलाज न मिलने और झाड़-फूंक के भरोसे रहने की प्रवृत्ति लगातार लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।सरपतहां निवासी सुंदरी देवी (30) बुधवार शाम खेत में घास काटने गई थीं।इसी दौरान उन्हें जहरीले सर्प ने डस लिया।

परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने में जुट गए।गुरुवार सुबह जब उनकी हालत बिगड़ने लगी और सांसें उखड़ने लगीं,तब उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुइथाकला लाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया।चिकित्सकों के अनुसार अब उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।क्षेत्र में यह पहला मामला नहीं है।जुलाई माह में झाड़-फूंक और इलाज में देरी के कारण तीन लोगों की मौत हो चुकी है।

3 जुलाई को कम्मरपुर गांव निवासी 65 वर्षीय सुदामा देवी पत्नी देवमन बिंद की सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक के चक्कर में जान चली गई।23 जुलाई को सरपतहां गांव के 5 वर्षीय अर्नव पुत्र यशवंत सिंह की मौत हो गई। परिजनों ने शुरुआत में इसे बिल्ली के काटने की आशंका मानकर इलाज में देर कर दी।वहीं खानपुर चौरवा सदरूद्दीनपुर गांव निवासी रामसूरत बिंद की 16 वर्षीय पुत्री अनीता की भी झाड़-फूंक के भरोसे रहने से मौत हो गई।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सर्पदंश के बाद हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।

मरीज की जान केवल समय पर मिलने वाले एंटी-वेनम उपचार से बचाई जा सकती है।झाड़-फूंक में समय गंवाने से जहर शरीर में फैल जाता है और मौत का खतरा बढ़ जाता है।चिकित्सक ने लोगों से अपील की है कि किसी भी जीव के काटने या सर्पदंश की स्थिति में तुरंत 108 एम्बुलेंस की सहायता लें और मरीज को निकटतम सीएचसी या जिला अस्पताल पहुंचाएं। अंधविश्वास से दूर रहकर समय पर चिकित्सकीय उपचार ही जीवन बचाने का सबसे सुरक्षित उपाय है।

















