स्पेशल डेस्क। तहलका 24×7 जातीय जनगणना से लोकतंत्र कमजोर होगा, प्राचीन भारतीय सनातन वैदिक हिन्दू धर्म कमजोर होगा, राष्ट्रीय भावना छिन्न-भिन्न होगी, जातीय दलों का नंगा नांच सड़कों पर होगा, जब राष्ट्रवाद जातिवाद को पीछे करके आगे बढ़ रहा है तो राष्ट्र को कमजोर करने के लिए जाति आधारित दल जो जातियों को कबीले के रूप मे प्रयोग करके अपनी रोज़ी रोटी चलाते रहे है वे राष्ट्रवाद की धार पर कमजोर पड़ चुके है इसलिए जाति आधारित जनगणना का आधार लेकर उन्माद फैलाने का कुचक्र रच रहे है।
यह जातिवादी नेता जो जाति आधारित दल या पार्टी चलाते है वे अपनी जातियों को कभी राष्ट्रोत्थान की बात नही बताते, केवल अधिकार की बात करते है, कर्तव्य क्या हो नैतिक तथा दैनिक उत्थान कैसे हो इसकी सीख नहीं देते क्योकि यदि इनकी जातियों को जिनके दम पर इन नेताओं की दुकानें चल रही है तथा इनका परिवार करोड़ों अरबों का मालिक बना बैठा है। कर्तव्य पथ क्या हो, राष्ट्र की उन्नति का विधान क्या हो इससे इन जातीय नेताओं को कोई मतलब नहीं बस सीधे साधे लोगों को जातीय उन्माद पैदा करके स्वयं का विकास करना इनका उद्देश्य है। इसलिए ऐसे जातीय नेताओं से सावधान रहने की आवश्यकता है तथा इनका विरोध होना आवश्यक है।
जाति आधारित जनगणना के बजाय गरीबी आधारित जनगणना क्योंकि नही की जाती है, गरीब आधारित जनगणना से इन जातिवादी नेताओं का कोई भला नही होने वाला है क्योंकि जाति के दम पर ही यह अमीर बने है हजारों करोड़ के आदमी है, जाति आधारित जनगणना से राष्ट्र कमजोर होगा याद रखो ऐसी मांग करने वाले दल व व्यक्ति राष्ट्र शत्रू है।