जौनपुर : धूमधाम से मनाई गई पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की 120वीं जयंती
जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7
समाजवादी पार्टी कार्यालय पर जिलाध्यक्ष लालबहादुर यादव की अध्ययता में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के 120वीं जंयती समारोह के अवसर पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर मनाया गया।चौधरी चरण सिंह के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए लाल बहादुर यादव ने कहा कि चौधरी चरण सिंह भारत के गृहमंत्री, उपप्रधानमंत्री और दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे और भारत के पांचवें प्रधानमंत्री थे। चरण सिंह किसानों की आवाज बुलंद करने वाले नेता मानें जाते थे।

प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यालय 28 जुलाई 1979 से 14 जनवरी 1980 तक रहा चौधरी चरण सिंह की व्यक्तित्व देहाती छवि का था। सादा जीवन उच्च विचार में विश्वास रखते थे। इस कारण पहनावा एक किसान की सादगी और दर्शाता था। एक प्रशासक के तौर पर उन्हें काफी सिद्धांतवादी और अनुशासन प्रिय माना जाता था। वे सरकारी अधिकारियों की लाल फीताशाही तथा भ्रष्टाचार के प्रबल विरोधी थे। चरण सिंह सामाजिक न्याय के पोषक और लोक सेवा भावना से ओत-प्रोत रहे। चरण सिंह एक राजनीतिक थे और हर राजनीतिज्ञ की एक संभावित इच्छा होती है वे राजनीतिक ऊंचाइयों पर पहुंचे इनमें कुछ भी अनैतिक नहीं था। चरण सिंह अच्छे वक्ता और बेतहरीन सांसद भी थे। वह जिस काम को करने का मन बना लेते थे फिर उसे पूरा करके ही रहतें थे।

चौधरी चरण सिंह राजनीतिक में स्वच्छ रखने वाली इंसान थे जिसका जीता जागता उदाहरण यही है कि जब उनको अपनी विरासत देनी थी तो उन्होंने राजनीतिक विरासत मुलायम सिंह यादव को दिया। वरासत अपने बेटे चौधरी अजीत सिंह को दिया वें अपने समकालीन लोगों को समान गांधीवादी विचारधारा में यकीन रखते थे। स्वत्रंतता प्राप्त करने के बाद गांधी टोपी को कई बड़े नेताओं ने त्याग दिया था लेकिन चौधरी चरण सिंह ने इसे जीवन पर्यन्त धारण किए रखा। जंयती समारोह में मुख्य रूप से यशवंता यादव, राजेंद्र यादव, टाइगर, प्रवक्ता राहुल त्रिपाठी, दीपचंद राम, श्रवण जायसवाल, आशा राम यादव, पूनम मौर्या, गप्पू मौर्या, आनंद मिश्रा, कलीम अहमद, कमालुद्दीन अंसारी मनोज मौर्या, रतन साहू, कृष्णा यादव, विकास यादव, सोनी यादव, तारा त्रिपाठी, गुड्डू सोनकर, भानु प्रताप मौर्या, मेवालाल गौतम, धर्मेंद्र सोनकर, दिनेश फौजी, महेश साहू, अरुण यादव, संचालन जिला उपाध्यक्ष श्याम बहादुर पाल ने किया।


















