न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट तत्काल सुनवाई को तैयार
नई दिल्ली।
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कैश डिस्कवरी विवाद में सुप्रीम कोर्ट, न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा मामले में तत्काल सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। बता दें कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के वकील कपिल सिब्बल ने बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय से अपने मुवक्किल की उस याचिका पर तत्काल सुनवाई करने का आग्रह किया।याचिका में आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट को अमान्य करने की मांग की गई है, इसमें न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को नकदी बरामदगी मामले में कदाचार का दोषी पाया गया था।

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष वर्मा की याचिका का उल्लेख किया।मुख्य न्यायाधीश ने सिब्बल से कहा कि उन्हें एक पीठ का गठन करना होगा और कहा कि उनके लिए इस मामले पर विचार करना उचित नहीं होगा।मुख्य न्यायाधीश ने कहा, मुझे एक पीठ का गठन करना होगा। सिब्बल ने पीठ से मामले को जल्द सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।

कहा कि उन्होंने याचिका में कुछ संवैधानिक मुद्दे उठाए हैं। वर्मा ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा 8 मई को संसद से उनके खिलाफ महाभियोग शुरु करने का आग्रह करने की सिफारिश को भी रद करने की मांग की है।22 मार्च को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी, जिसमें हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जीएस संधावालिया और कर्नाटक उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनु शिवरामन शामिल थीं।

न्यायमूर्ति वर्मा ने अपनी रिट याचिका में आंतरिक प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाया और दावा किया कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई और उचित प्रक्रिया से वंचित किया गया। उन्होंने पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा दिए गए सुझाव को चुनौती दी और दावा किया है कि उनके द्वारा गठित न्यायाधीशों की समिति ने उन्हें आरोपों का खंडन करने या गवाहों से जिरह करने का अवसर नहीं दिया। न्यायमूर्ति वर्मा ने न्यायाधीशों के पैनल द्वारा जांच शुरु करने से पहले औपचारिक शिकायत न होने का मुद्दा भी उठाया है।

तर्क दिया कि 22 मार्च को उनके खिलाफ आरोपों का खुलासा करते हुए एक प्रेस विज्ञप्ति अपलोड करने के सर्वोच्च न्यायालय के कृत्य से मीडिया में तीव्र अटकलें लगाई गईं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन हुआ।उन्होंने दावा किया कि समिति बुनियादी तथ्यों की जांच करने में विफल रही, खासकर 14 मार्च को नकदी की कथित बरामदगी से संबंधित तथ्यों की, जो उनकी दोषसिद्धि को साबित करने के लिए जरूरी हैं।

यह नकदी कथित तौर पर 14-15 मार्च को हुई आग की घटना के दौरान दिल्ली उच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश न्यायमूर्ति वर्मा के आवास पर मिली थी। आंतरिक जांच समिति द्वारा वर्मा पर अभियोग लगाए जाने के बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने उन्हें इस्तीफ़ा देने के लिए प्रेरित किया। इस विवाद के बीच दिल्ली उच्च न्यायालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय स्थानांतरित किए गए न्यायमूर्ति वर्मा ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति वर्मा के इस्तीफा देने से इनकार करने के बाद न्यायमूर्ति खन्ना ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा।
















