“प्रेमचंद जयंती” पर विशेष ! प्रेमचंद जन- मन में जिंदा हैं

“प्रेमचंद जयंती” पर विशेष ! प्रेमचंद जन- मन में जिंदा हैं

# शैलेंद्र कुमार मिश्र की नवीन कृति..

प्रेमचंद जन- मन को भाते, गरीब- अमीर का सब भेद मिटाते..
‘धनपत’ की चर्चा जब होती, चित्र- सदृश्य मन में छा जाते..
‘होरी’ ‘धनिया’ मिल जाते हैं, हम सब के खेत मेड़ों पर..
‘गोबर’ अब तो दिख जाता है, गांव- नगर के मोड़ों पर..
सिसक ‘निर्मला’ दिन काटती, बेमेल- विवाह के झमेले में..
‘सेवासदन’ की सुमन दिखती है, गली- मोहल्लों के नुक्कड़ में..
‘गबन’ के आभूषण प्रेम की कहानी, रची बसी है जन- मन में..
‘नमक का दारोगा’ आज भी दिखता, घूसखोरों की करस्तानी में..
‘पूस की रात’ की ठिठुरन- दास्तान, छीन रही फुटपाथियों की मुस्कान..
‘बड़े घर की बेटी’ दिख जाती है, कहीं किसी के अब भी घर में..
‘मंत्र’ की मानवता मिल जाती है, अब भी कुछ बड़े बुजुर्गों में..
‘कफन’ के घीसू अक्सर मिल जाते, गांव- नगर के मदिरालय में..
प्रेमचंद अब भी जीवित हैं, ‘कायाकल्प’ की सुमन में..
‘ईदगाह’ के हामिद के मन में, ‘बूढ़ी काकी’ के तन -मन में..
रचनाकार
शैलेंद्र कुमार मिश्र
सेंट थॉमस इंटर कॉलेज, शाहगंज, जौनपुर, उप्र
9451528796
स्थायी पता : लहरतारा, नई बस्ती, वाराणसी
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