भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका, निष्पक्ष जांच व परिवार की सुरक्षा की मांग

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका, निष्पक्ष जांच व परिवार की सुरक्षा की मांग

पटना। 
तहलका 24×7
              भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है।इस प्रकरण को लेकर पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है।याचिका में मामले की निष्पक्ष जांच कराने,दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की गई है।
याचिका अधिवक्ता मुकेश कुमार द्वारा दायर की गई है। उन्होंने मामले की त्वरित सुनवाई के लिए पटना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय की खंडपीठ से अनुरोध किया है।याचिकाकर्ता ने घटना की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराए जाने की आवश्यकता जताई है।याचिका में कहा गया है कि घटना से पूर्व सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें भरत भूषण तिवारी के हाथ में कथित रुप से पिस्तौल दिखाई दे रही थी।
अधिवक्ता ने सवाल उठाया है कि यदि युवक के पास वास्तव में हथियार था तो उस समय उसकी गिरफ्तारी अथवा हथियार जब्त करने की कार्रवाई क्यों नहीं की गई।मृतक के परिजनों का आरोप है कि भरत भूषण तिवारी का फर्जी एनकाउंटर किया गया।उनका कहना है कि घटना के समय उसके पास कोई हथियार नहीं था और उसने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था। परिजनों का यह भी आरोप है कि विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने मृतक के पिता,भाई और कुछ स्थानीय लोगों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कर दी।
वहीं पुलिस का कहना है कि भरत तिवारी की ओर से 10 से 12 राउंड फायरिंग की गई थी।पुलिस के अनुसार आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई,जिसमें उसकी मौत हो गई।गौरतलब है कि 17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस कार्रवाई के दौरान भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई थी।घटना के बाद से ही राजनीतिक, सामाजिक स्तर पर इसे लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।मामले में प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है।
साथ ही शाहपुर थाना प्रभारी को भी निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।राज्य सरकार ने मामले की जांच किसी सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश से कराने की घोषणा की है।हालांकि याचिकाकर्ता का कहना है कि घोषणा के बावजूद अब तक इसकी औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।जनहित याचिका में भरत भूषण तिवारी के परिजनों को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की गई है।अधिवक्ता मुकेश कुमार का कहना है कि निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई से ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।
Previous articleबभनौटी में शोक सभा आयोजित कर भरत भूषण तिवारी को दी गई श्रद्धांजलि
Next article14 गौसेवकों की उम्रकैद माफ करने की मांग, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
Tahalka24x7
तहलका24x7 की मुहिम... "सांसे हो रही है कम, आओ मिलकर पेड़ लगाएं हम" से जुड़े और पर्यावरण संतुलन के लिए एक पौधा अवश्य लगाएं..... ?