सप्ताहभर चलने वाला ऐतिहासिक सीता श्रृंगार मेला शुरु, पुरुषों को प्रवेश नहीं 

सप्ताहभर चलने वाला ऐतिहासिक सीता श्रृंगार मेला शुरु, पुरुषों को प्रवेश नहीं 

शाहगंज, जौनपुर। 
एखलाक खान
तहलका 24×7
                सनातनी परंपरानुसार श्रीराम लीला मंचन, दशहरा, भरत मिलाप के बाद प्रदेश में लगने वाला इकलौता सीता श्रृंगार मेला यानी चूड़ी मेला की शुरुआत हो गई है। उक्त मेला सप्ताहभर चलेगा, जो धनतेरस के दिन संपन्न होगा। मेले की खास बात यह है कि यहां महिलाओं का जमावड़ा होता है और ये मेला गंगा जामुनी संस्कृति का बेहतरीन उदाहरण होता है।
श्रीराम लीला समिति द्वारा आयोजित रामलीला मंचन, दशहरा, भरत मिलाप के बाद नगर के पूर्वी कौड़ियां मोहल्ले में सीता श्रृंगार मेले का आयोजन किया जाता है। बदलते समय में उक्त श्रृंगार हाट चूड़ी मेले के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मान्यता है कि जब माँ जानकी मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के साथ 14 वर्ष का वनवास और लंकापति रावण के वध के पश्चात अयोध्या पहुंचीं तो अपने सजने संवरने की सामाग्री खरीदने के लिए सहेलियों संग अयोध्या के श्रृंगार हाट बाजार पहुंची थीं।
उसी कड़ी को जोड़ते हुए श्रीराम लीला समिति द्वारा नगर के पूर्वी कौड़ियां मोहल्ले के एक स्थान पर उक्त मेले का आयोजन किया गया। जिसे आज चूड़ी मोहल्ला का नाम दे दिया गया।बताते चलें कि इस ऐतिहासिक मेले में प्रति वर्ष दुकानदारों द्वारा कुछ अलग किया जाता है, जो इस साल भी दुकानदार अपने अलग अंदाज में चूड़ियां और कंगन की नई वेरायटी के साथ मेले की शोभा बढ़ाने के लिए अपनी दुकानों को सजाकर बैठ चुके हैं।
सानिया एंड मुस्कान फर्म वाराणसी के अधिष्ठाता गुड्डू ने बताया कि दादा अब्दुल गफूर के बाद पिता मो. असलम दुकान लगाते रहे, तीसरी पीढ़ी का होने के बाद बीस साल से लगातार आता हूं और मेले में यहां के लोगों के प्रेम और सहयोग से दुकान लगाता हूं। इस बार विभिन्न प्रकार के कंगन और फिरोजाबादी कांच की चूड़ियों के अलावा दिल्ली की मेटल वाली चूड़ियों की खनक से मेला खनकेगा।चूड़ियों के अलावा बनारस के राज बैग वाले हाजी बाबू बैग का उम्दा कलेक्शन से मेले की शोभा बढ़ाएंगे।
वाराणसी से आए मो. शाहिद बरेली का झुमका महिलाओं के बीच लेकर पहुंचे हैं। रहीम अहमद शार्ट कुर्ती की डिजाइन लेकर पहुंचे हैं। इसके अलावा आजमगढ़, सुल्तानपुर जैसे शहरों के लोग अपनी दुकानों को सजाकर लुभा रहे हैं। स्थानीय दुकानदार भी मेले की शोभा बढ़ाने से पीछे नहीं हैं। यहां बच्चों के खिलौनों के साथ चाट पकौड़े की दुकानों पर महिलाएं भूली बिछड़ी और पुरानी सहेलियों संग खरीदारी के साथ अपनी पुरानी यादों और वर्तमान की झंझावातों के किस्सों का बखान करती हैं। सीता श्रृंगार मेले में भारी संख्या में नकाबपोश महिलाओं की उपस्थिति गंगा जामुनी तहज़ीब को चार चांद लगाती हैं। नगर की बेटियां कहीं भी ब्याही हों लेकिन उन्हें इस मेले का बेसब्री से इंतजार रहता है।
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