स्मृति शेष…..

स्मृति शेष…..

मां की दूसरी पुण्यतिथि पर राजकुमार अश्क की अश्रुपूरित श्रद्धांजलि…

भूल नहीं पाता हूँ तेरी गोदी जिस
पर सर रख कर मैं सोया करता था.
भूल नहीं पाता हूँ तेरा आंचल जिस
पर मैं आसूं पोछा करता था.
तेरे हाथों की गर्म सहलाहट मुझे
आज भी महसूस होती,
तेरा प्यार से मुझे डाटना आज भी
एहसास कराता है.
मगर छिप गयी है तू मेरी आखों से
खो गयी है तू भी दुनिया की भीड़ में,

मगर फिर भी………

मेरी माँ पास मेरे रोज ही आ जाती है.
वो लोरी गा के मुझे रोज़ सूला जाती है
भटकने जब भी लगा हूँ कभी राहों से
मुझे वो आके सही राह दिखा जाती है
कभी घेरा जो गमों ने तो वही आ करके
मेरे साहस को भी पल में बढा जाती है
मुझे है याद सभी बात जो वो करती थी
मगर वो याद मुझे फिर भी दिला जाती है
बहे है जब भी मेर “अश्क” तो वो आ करके
हमारे आंख के आसूं को चुरा जाती है.

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