“तिरंगे की लहर में आज़ादी का जज़्बा”

“तिरंगे की लहर में आज़ादी का जज़्बा”

एखलाक खान
समाचार संपादक
तहलका 24×7/संवाद
                    15 अगस्त… तारीख़ वही, जज़्बा नया। सुबह-सुबह गूंजता राष्ट्रगान, आसमान में लहराता तिरंगा और आंखों में चमकते सपने, यह नज़ारा सिर्फ एक पर्व का नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की धड़कन का है। आज का दिन हमें 1947 की उस ऐतिहासिक सुबह में ले जाता है, जब भारत ने गुलामी की जंजीरों को तोड़कर आज़ादी की पहली सांस ली थी।यह पर्व सिर्फ इतिहास की याद नहीं, बल्कि आने वाले कल के लिए एक वादा भी है।
महात्मा गांधी का सत्य, भगत सिंह का बलिदान, नेताजी सुभाष का साहस और असंख्य गुमनाम क्रांतिकारियों का संघर्ष। इन सबकी बदौलत हमें यह अनमोल स्वतंत्रता मिली है। लेकिन आज़ादी का मतलब सिर्फ अंग्रेज़ों के शासन से मुक्ति नहीं, बल्कि हर उस बेड़ी को तोड़ना है, जो प्रगति की राह में रोड़े अटकाती है, चाहे वह गरीबी हो, अशिक्षा हो, भ्रष्टाचार हो या भेदभाव।
आज तिरंगे की हर लहर हमसे यह कह रही है कि “देश को केवल यादों में मत सजाओ, इसे कर्म से संवारो।” इस स्वतंत्रता दिवस पर आइए, हम सिर्फ उत्सव न मनाएं, बल्कि यह संकल्प लें कि अपने कर्तव्यों को निभाकर, अपने काम में ईमानदारी और मेहनत से देश को और ऊंचाइयों तक पहुंचाएं। क्योंकि असली आज़ादी तब होगी, जब हर घर रोशन होगा और हर दिल खुशहाल।
जय हिंद! जय भारत!
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