आजमगढ़ : जांच में मामला सही निकला तो फंसेगी कईयों की गर्दनें
आजमगढ़।
फैज़ान अहमद
तहलका 24×7
भाजपा के पूर्व महामंत्री रविशंकर द्वारा मंडलीय चिकित्सालय के अधिकारी और डॉक्टर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मंडलायुक्त को दिए गए शिकायती पत्र की जांच फिर शुरू हो गई है। जांच में भ्रष्टाचार का मामला अगर सही पाया गया तो कई पर इसकी तलवार लटक सकती है।मंडलायुक्त को संबोधित शिकायती पत्र में 15 बिंदुओं पर आरोप लगाया है। जिलाधिकारी ने जाँच के आदेश जारी किए, तीन सदस्यीय जाँच कमेटी गठित हुई लेकिन लोकसभा उप चुनाव के चलते जाँच लटक गई थी।

जांच कमेटी को फिर से सक्रिय किया गया है। साक्ष्य सहित की गई शिकायत में अस्पताल को भ्रष्टाचार का अड्डा बताते हुए शासकीय धन की लूट किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत कर्ता का आरोप है कि कुछ कर्मचारी यहां ऐसे है जो कई वर्षों से यहां जमे हुए है। स्थानांतरण होने पर विकलांग प्रमाण पत्र तो कभी राजनीतिक दबाव के बल पर अपना स्थानांतरण रुकवा लेते है। अस्पताल में संविदा, आउटसोर्सिंग के 18 पदों पर नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. चंद्रहास ने नियम विरुद्ध तरीके से नियुक्ति किया है। पूर्व एसआई डॉ. एसके सिंह ने शासन को पत्र लिख कर बताया था कि ई-हॉस्पिटल के संचालन के लिए कर्मचारी प्रशिक्षित हो चुके है। जिसके चलते संविदा पर कार्य कर रहे 12 आपरेटरों की सेवा समाप्त कर दी गई। इसके बाद नए एसआईसी ने फिर छह कंप्यूटर आपरेटरों को नियुक्त किया है। ई-हास्पिटल के लिए 2019 से प्रत्येक वर्ष कप्यूटर व लैपटॉप की खरीद एसआईसी, नेत्र रोग विशेषज्ञ व ब्लड बैंक एलटी सुबास पांडेय के फर्मो के माध्यम से बाजार से अधिक रेट पर किया जा रहा है।


















