काश! घर न आया होता लक्ष्मण… माह भर पहले ही छुट्टी लेकर लौटा था

काश! घर न आया होता लक्ष्मण… माह भर पहले ही छुट्टी लेकर लौटा था

# दो मासूम बेटों के सिर से उठा पिता का साया,पत्नी की चीख से दहला गांव,मां बार-बार हो रही बेहोश

सुइथाकला, जौनपुर। 
राजेश चौबे 
तहलका 24×7 
              रविवार को बरौद माइनर पुल के पास हुए सड़क हादसे ने भटौली गांव के एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं।दो बाइकों की आमने-सामने हुई टक्कर में लक्ष्मण (35)की मौत की खबर जैसे ही घर पहुंची,वहां चीख-पुकार मच गई।जिस लक्ष्मण के घर लौटने से परिवार में खुशियां आई थीं, lउसी के शव ने पूरे परिवार को ऐसा गम दिया,जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी।
लक्ष्मण तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था।परिवार की रोजी-रोटी चलाने के लिए वह बड़े भाई विनोद के साथ लुधियाना में रहकर मजदूरी करता था।करीब एक माह पहले ही वह पत्नी माधुरी और अपने चार वर्षीय बेटे प्रांजल तथा दो वर्षीय पीयूष से मिलने के लिए छुट्टी लेकर घर आया था।परिवार को क्या पता था कि अपनों से मिलने आया लक्ष्मण अब कभी वापस नहीं जाएगा।रविवार दोपहर वह बाइक से सराय मोहिउद्दीनपुर की ओर जा रहा था।
बरौद माइनर पुल के पास सामने से आ रही दूसरी बाइक से उसकी जोरदार भिड़ंत हो गई।हादसे में गंभीर रुप से घायल लक्ष्मण ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया।लक्ष्मण की मौत के बाद परिजनों की जुबां पर बार-बार यही बात आ रही थी कि अगर वह घर नहीं आया होता तो शायद आज जिंदा होता।छुट्टी लेकर घर लौटे बेटे को खोने का दर्द मां सुदामा सहन नहीं कर पा रही हैं।बेटे का शव देखते ही वह बार-बार बेहोश हो जा रही थीं।
उन्हें संभालने के लिए जुटे लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे।वहीं पत्नी माधुरी अपने दोनों मासूम बच्चों को सीने से लगाकर बिलखती रही।चार साल का प्रांजल और दो साल का पीयूष शायद यह भी नहीं समझ पा रहे थे कि उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है।लक्ष्मण की मजदूरी से ही परिवार की रोजी-रोटी चलती थी।उसकी असमय मौत ने पत्नी और दोनों मासूम बच्चों के सामने जीवन की कठिन राह खड़ी कर दी है।
जिस घर में कुछ दिन पहले छुट्टी पर आए बेटे और पिता के साथ खुशियां थीं,वहां अब मातम पसरा है।परिजनों के करुण विलाप से गांव का माहौल गमगीन हो गया। जिसने भी लक्ष्मण के परिवार की हालत देखी,उसकी आंखें नम हो गईं।पूरे गांव में मातम और सन्नाटा पसरा रहा।लोगों की जुबां पर बस यही था,किसे पता था कि छुट्टी पर घर आया लक्ष्मण अब कभी काम पर लौटने के लिए नहीं उठेगा।
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