गोमती घाटों के निर्माण में एनजीटी गाइडलाइन की अनदेखी : गौतम गुप्ता
जौनपुर।
गुलाम साबिर
तहलका 24×7
स्वच्छ गोमती अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि नगर के उत्तरी छोर पर बने नए घाट (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के मानक अनुरूप नही बनाये गए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार पूरी कार्ययोजना के दौरान NGT की NOC भी नही ली गयी है। यदि ऐसा है तो फिर किस अधिकार से नमामि गंगे द्वारा वहां नदी में अतिक्रमण करते हुए नए घाटों का निर्माण कर दिया गया?

मुगल कालीन ऐतिहासिक शाही पुल जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित है, उसके दो ताखे जहां से सदियों से मां गोमती की अविरल धारा बहती थी, उसे किसकी अनुमति से पाथ-वे बनाकर पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया, किसकी अनुमति से मां गोमती की धारा को सदा के लिए अवरुद्ध कर मोड़ दिया गया। कौन लेगा इन सबकी ज़िम्मेदारी लेंगे? नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की NOC के बिना आखिर कैसे हो गया मनमाना निर्माण कार्य।स्वच्छ गोमती अभियान का जिला प्रशासन से अनुरोध है कि यथा शीघ्र इन विषयों का संज्ञान लेते हुए इसकी जांच कराई जाए, यदि सभी आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाए।

जलनिगम व नमामि गंगे के अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री के जौनपुर दौरे के दौरान जिन नालों का ट्रैप होना बताया गया, जिनमें प्रमुख रूप से हनुमान घाट, पंचहटिया, इत्यादि नाले हैं वो अभी तक सीधे गोमती नदी में गिर रहे हैं। आखिर कौन लेगा इसका श्रेय? घाट निर्माण की कार्यदायी फर्म द्वारा घाट निर्माण के बाद उसका मलबा नदी में डाल दिया गया। जिसकी वजह से गोमती नदी की काफी दुर्दशा हो रही है। गौतम गुप्ता ने कहा कि इन सब विसंगतियों के बीच जिलाधिकारी डा. दिनेश चन्द्र सिंह, सदस्य विधान परिषद बृजेश सिंह प्रिंशु व चेयरमैन प्रतिनिधि डॉ. रामसूरत मौर्य द्वारा नदी की डिसिल्टिंग कार्य में सहयोग किया जाना एक सुखद अनुभूति जैसा भी है। स्वच्छ गोमती अभियान अगले एक सप्ताह के भीतर जिलाधिकारी जौनपुर को इन सभी विसंगतियों के सापेक्ष एक विस्तृत ज्ञापन सौंपेगा।


















