जौनपुर : शाहगंज निकायनामा वार्ड संख्या चार..

जौनपुर : शाहगंज निकायनामा वार्ड संख्या चार..

# अल्पसंख्यक बाहुल्य होने की वजह से वार्ड के साथ हुआ सौतेला व्यवहार

# लगातार पांच बार रहे सभासद भी नहीं बदल सके वार्ड की बदहाली

शाहगंज।
रविशंकर वर्मा
तहलका 24×7
             नगर पालिका का वार्ड नंबर 4 लापरवाही और अनदेखी का शिकार है। पूरा वार्ड भरी हुई नालियों, बेशुमार गंदगी और टूटे फूटी जर्जर रास्तों की समस्या झेल रहा है। मौजूदा सभासद लगातार पांच बार से जीत रहे हैं, बावजूद इसके समस्याओं का निदान नहीं होने के चलते उनके प्रति भी वार्ड के लोगों में भारी असंतोष है, जबकि सभासद का कहना है कि चेयरमैन और पालिका द्वारा उनके और उनके वार्ड के साथ जान-बूझकर सौतेला व्यवहार किया गया। फिलहाल लोग ऐसा जनप्रतिनिधि चाहते हैं, जो उनकी समस्या को अपना समझकर दमदारी से उसका निस्तारण कराए।
वार्ड नंबर चार भटियारी सराय शाहगंज नगर पालिका क्षेत्र के उत्तरी छोर का सीमावर्ती वार्ड है। वार्ड में पसमांदा मुसलमानों की बड़ी आबादी रहती है। यह भी एक वजह है कि लगातार पांच टर्म से वार्ड के सभासद रहे मसूद हसन को हर बार जीत मिली। हालांकि इस बार आरक्षण की वजह से वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुआ है और बदलाव तय है।
वार्ड की मुख्य समस्या नालियों की दिखाई दी। पूर्व में सभासद का चुनाव लड़ चुके मो. जावेद खान ने बताया कि बीते 10 सालों से नालियों की मरम्मत और ढंग से सफाई नहीं हुई। बिजली के तार जहां तहां लटके हुए हैं। सुनील यादव ने कहा कि नालियां टूट गई हैं। विजय सोनी ने बताया कि नालियां साफ नहीं होती, जब होती हैं तो कचड़ा नहीं उठता। नालियों पर लगी पटिया टूट चुकी है लेकिन बार बार शिकायत पर भी नहीं लगी। मोहम्मद अतहर कहते हैं कि नालियां नए सिरे से बनाने की जरूरत है। इम्तियाज अंसारी ने कहा कि सफाई के हालात बहुत खराब हैं। मोहम्मद आफताब ने भी नालियों को साफ कराने और उनकी मरम्मत करने की जरूरत बताई। इसके अलावा टूटी, उधड़ी इंटरलॉकिंग भी लगातार दुर्घटना का सबब बन रही है।
सभासद मसूद हसन ने कहा कि विकास निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और इस कार्यकाल में चेयरमैन द्वारा उनके प्रस्तावों को जान-बूझकर अनदेखा करने की वजह से उनके वार्ड का विकास और सुधार प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक बाहुल्य होने की वजह से उनके वार्ड के साथ सौतेला व्यवहार किया गया। इसके अलावा उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति के महज 40 वोटर होने के बावजूद उनके वार्ड को राजनीतिक उद्देश्य से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित करवा दिया गया।
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