बीमा कंपनी को बड़ा झटका, ट्रक चालक की पत्नी को 15 लाख रुपये देने का आदेश

बीमा कंपनी को बड़ा झटका,ट्रक चालक की पत्नी को 15 लाख रुपये देने का आदेश

जौनपुर।
गुलाम साबिर 
तहलका 24×7
             बीमा कंपनी के खिलाफ दाखिल परिवाद में जिला उपभोक्ता आयोग ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मृत ट्रक चालक की पत्नी को 15 लाख रुपये बीमा राशि देने का आदेश दिया है।आयोग ने कहा कि मारपीट के बाद पेट्रोल छिड़ककर की गई हत्या को आकस्मिक मृत्यु माना जाएगा और बीमा कंपनी दावा देने से इनकार नहीं कर सकती।जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह एवं सदस्य गीता ने अपने आदेश में कहा कि परिवादिनी कुसुमलता को 15 लाख रुपये की पर्सनल एक्सीडेंट बीमा राशि परिवाद दाखिल करने की तिथि से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित दी जाए।
साथ ही मानसिक एवं शारीरिक कष्ट के लिए 10 हजार रुपये तथा वाद व्यय के रुप में 3 हजार रुपये 45 दिनों के भीतर अदा किए जाएं।मामला बदलापुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है।आजमगढ़ के सरायमीर निवासी कुसुमलता ने अपने पति सत्य प्रकाश राय की मौत के बाद बीमा कंपनी के खिलाफ परिवाद दाखिल किया था।परिवाद के अनुसार 16 सितंबर 2020 को सत्य प्रकाश राय ट्रक चलाकर अपने पुत्र के साथ जा रहे थे।सरोखनपुर के पास इंडिका कार से पहुंचे कुछ लोगों ने खुद को फाइनेंसर बताते हुए ट्रक रुकवाया और पैसों की मांग करने लगे।
आरोप है कि रुपये न देने पर आरोपियों ने सत्य प्रकाश राय को ट्रक से नीचे उतारकर बुरी तरह पीटा और बाद में पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी।गंभीर रुप से झुलसे चालक की 21 सितंबर 2020 को उपचार के दौरान मौत हो गई।बीमा कंपनी ने दावा किया कि मृतक ने स्वयं पेट्रोल डालकर आत्महत्या की थी,इसलिए पर्सनल एक्सीडेंट बीमा का लाभ देय नहीं है।कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि दुर्घटना बीमा का लाभ तभी मिलता है जब बीमाधारक घटना के समय वाहन चला रहा हो।
वहीं परिवादिनी की ओर से कहा गया कि मृतक ट्रक चला रहा था और रास्ते में जबरन उतारकर हमला किया गया।मृतक के पुत्र श्यामानंद ने पुलिस विवेचना पर सवाल उठाते हुए न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया,जिसके बाद अदालत ने 8 मार्च 2022 को मामले में हत्या की धारा 302 जोड़ने का आदेश दिया था।आयोग ने अपने फैसले में कहा कि हत्या और आकस्मिक हत्या में स्पष्ट अंतर है।
यदि मृत्यु अचानक और अप्रत्याशित घटना के कारण होती है तो उसे आकस्मिक मृत्यु माना जाएगा। आयोग ने माना कि फाइनेंसर के लोगों द्वारा अचानक हमला कर पेट्रोल डालकर जलाने से हुई मृत्यु पर्सनल एक्सीडेंट बीमा के दायरे में आती है।बीमा कंपनी द्वारा भुगतान से इनकार करना सेवा में कमी माना गया।
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