रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार हुआ बीज प्रमाणीकरण संस्था का उपनिदेशक
# 70 हजार की रिश्वत मांगने का आरोप,10 हजार लेते विजिलेंस ने दबोचा,सेवानिवृत्ति से करीब 70 दिन पहले हुई कार्रवाई
मुरादाबाद।
तहलका 24×7
भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में विजिलेंस टीम ने उत्तर प्रदेश राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था के उपनिदेशक रूप सिंह को कथित रुप से 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।आरोप है कि बीजों के सत्यापन और टैग जारी करने के एवज में अधिकारी ने कुल 70 हजार की रिश्वत मांगी थी।जानकारी के अनुसार,उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के उचैती केंद्र में तैनात कनिष्ठ भंडार अधिकारी विजय वर्मा ने इस संबंध में बरेली विजिलेंस से शिकायत की थी।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि उनके केंद्र पर तैयार किए गए गेहूं के बीजों के सत्यापन और टैग जारी करने के लिए उपनिदेशक रुप सिंह द्वारा 70 हजार की मांग की जा रही थी।बताया गया कि जब शिकायतकर्ता ने 70 हजार की रकम को अधिक बताया तो कथित तौर पर अधिकारी ने तत्काल 10 हजार देने और शेष 60 हजार अगस्त के दूसरे सप्ताह में देने की बात कही। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस अधिकारियों ने मामले की जांच कराई।आरोप सही पाए जाने के बाद इंस्पेक्टर अंगद सिंह के नेतृत्व में 12 सदस्यीय टीम गठित की गई।

विजिलेंस टीम की योजना के अनुसार शिकायतकर्ता विजय वर्मा को मुरादाबाद के मझोला थाना क्षेत्र स्थित मंडी समिति परिसर में उत्तर प्रदेश राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था के कार्यालय भेजा गया।शिकायतकर्ता ने कथित रुप से 10 हजार की रकम रुप सिंह को दी,पहले से घात लगाए विजिलेंस टीम ने घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया।रिपोर्ट के अनुसार, कार्रवाई से पहले विजिलेंस के निर्देश पर शिकायतकर्ता ने आरोपी अधिकारी से बातचीत की रिकॉर्डिंग भी की थी।

बताया गया है कि शिकायतकर्ता ने अधिकारी को विश्वास में लेने के लिए पहले 15 हजार भी दिए थे।
इसके बाद तय योजना के तहत 10 हजार की रकम देने की कार्रवाई की गई।शिकायतकर्ता का आरोप है कि वह करीब दो महीने से बीजों के सत्यापन और टैग जारी कराने के लिए अधिकारी के कार्यालय के चक्कर लगा रहा था।आरोप है कि रिश्वत की मांग पूरी न होने के कारण उसका काम आगे नहीं बढ़ाया जा रहा था। परेशान होकर उसने करीब एक सप्ताह पहले बरेली विजिलेंस से शिकायत की थी।

मामले की खास बात यह है कि आरोपी उपनिदेशक रुप सिंह की सेवानिवृत्ति 2 अक्टूबर 2026 को होनी थी। यानी कार्रवाई के समय उनकी सेवानिवृत्ति में करीब 70 दिन शेष थे।विजिलेंस टीम आरोपी अधिकारी को मुरादाबाद से बरेली ले गई।उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।मामले में आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किए जाने की प्रक्रिया शुरु कर दी गई।विजिलेंस की इस कार्रवाई के बाद सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी के खिलाफ सख्ती को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
















