लखनऊ : केजीएमयू प्रशासन ने 262 फीसदी ज्यादा कीमत पर खरीदीं कोरोना किट

लखनऊ : केजीएमयू प्रशासन ने 262 फीसदी ज्यादा कीमत पर खरीदीं कोरोना किट

# ऑडिट में हुआ खुलासा, जांच कमेटी ने 4 अगस्त तक मांगा लिखित जवाब

लखनऊ।
विजय आनंद वर्मा
तहलका 24×7
               वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान केजीएमयू प्रशासन ने 16 से 262 फीसदी तक ज्यादा कीमत पर प्लास्टिक वेयर, कोरोना किट और रीजेंट खरीदे। लेखा परीक्षा प्रथम की ऑडिट आपत्ति के बाद अब यह मामला गरमा गया है। शासन ने केजीएमयू को चार अगस्त तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। इसके बाद चिकित्सा संस्थान के वित्त नियंत्रक ने माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अध्यक्ष को पत्र लिखकर तीन दिन में जवाब मांगा है।

ऑडिट आपत्ति में कहा गया कि केजीएमयू ने कोविड-19 की जांच के लिए अक्तूबर 2020 में तीन फर्म से प्लास्टिक वेयर, किट्स और रीजेंट की सप्लाई के लिए कोटेशन लेकर एक साल के लिए मूल्य आधारित आपूर्ति के लिए करार किया। हालांकि, अनुबंध से पहले ही तीनों फर्म से 1.37 करोड़ का सामान खरीदा। टेंडर के बाद तय हुए रेट के मुकाबले यह 16 से 262 फीसदी तक ज्यादा महंगा था। इससे केजीएमयू ने 42.21 लाख रुपये ज्यादा का भुगतान किया।

मार्च में दाखिल जवाब में केजीएमयू ने कहा कि उस समय महामारी की वजह से टेंडर पूरा नहीं हो पाया था। ऐसे में मरीजों के हित में कोटेशन के आधार पर कोरोना किट और अन्य सामान खरीदा गया था। हालांकि, इस जवाब को लेखा परीक्षा ने खारिज कर दिया है। कहा गया कि अप्रैल से जून 2020 तक लॉकडाउन था। इस दौरान टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा सकती थी।

वहीं, फर्म से कोटेशन के आधार पर छोटे-छोटे ऑर्डर जारी करने के बजाय ज्यादा मात्रा में सामान खरीदा गया। ऐसे में फर्म ने महंगे रेट पर सामान दिया, जबकि टेंडर में इसी फर्म ने इससे कम कीमत कोट की। केजीएमयू के वित्त नियंत्रक विनय कुमार राय का कहना है कि नियमों के तहत ऑडिट आपत्तियों का निस्तारण एक महीने में करना होता है। खरीद में ऑडिट आपत्ति के निस्तारण के लिए पत्र लिखकर जवाब मांगा गया है।
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