लिखना शिक्षा की सबसे बड़ी विधा,इससे विषय की गहरी समझ विकसित होती है : प्रो.अवध ओझा
पिंडरा, वाराणसी।
नितेश गुप्ता
तहलका 24×7
प्रसिद्ध मोटिवेटर,पतंजलि प्रशासनिक सेवा अकादमी के अध्यक्ष प्रो.अवध ओझा ने कहा कि”बिना सोचे पढ़ा जा सकता है,लेकिन बिना सोचे लिखा नहीं जा सकता।इसलिए पढ़ने के साथ-साथ लिखना भी जरुरी है,क्योंकि लेखन से विषय का मनन और गहरी समझ विकसित होती है।लिखना शिक्षा की सबसे बड़ी विधा है।”वे शुक्रवार को बरजी स्थित बनारस पब्लिक स्कूल में आयोजित मोटिवेशनल कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं,बल्कि व्यक्ति में विवेक और सही सोच विकसित करना है।तथ्य समय के साथ भुलाए जा सकते हैं,लेकिन मन मस्तिष्क में उत्पन्न हुए विचार जीवनभर साथ रहते हैं।प्रो.ओझा ने कहा कि जिन बातों का जीवन पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता,उन पर समय व्यर्थ करना बुद्धिमानी नहीं है।जीवन में दुख भले कम हों,लेकिन चुनौतियां हर कदम पर मिलती हैं और जो उनका साहसपूर्वक सामना करता है,वही सफलता हासिल करता है।

उन्होंने शिक्षा के चार प्रमुख चरण,मनन (समझ),लेखन,
चर्चा और विद्यादान का उल्लेख करते हुए कहा कि यही प्रक्रिया व्यक्ति को सफल बनाने के साथ उसमें संस्कार भी विकसित करती है,जिससे समाज और देश समृद्ध बनता है।कार्यक्रम के दौरान प्रो.ओझा ने छात्र छात्राओं की जिज्ञासाओं का उदाहरणों के माध्यम से समाधान किया।उन्होंने सलाह दी कि जिस विषय में कमजोरी महसूस हो,उसे नियमित रुप से लिखना शुरु कर दें, इससे उस विषय पर मजबूत पकड़ बन जाएगी।उन्होंने कई छात्रों से प्रश्न भी पूछे।छात्रों द्वारा आत्मविश्वास के साथ सही उत्तर देने पर उन्हें नकद पुरस्कार देकर उत्साहवर्धन भी किया।


















