सुदामा चरित्र की कथा सुन श्रोताओं ने पढ़ा मित्रता का पाठ

सुदामा चरित्र की कथा सुन श्रोताओं ने पढ़ा मित्रता का पाठ

सुइथाकला, जौनपुर।
राजेश चौबे
तहलका 24×7
            श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन श्रोता कथाकार द्वारा सुदामा चरित्र की कथा सुन मित्रता का पाठ पढ़े। कथा का शुभारंभ पूर्व की भांति मुख्य यजमान सुशीला, राकेश चन्द्र मिश्र द्वारा भागवत पुराण और व्यास गद्दी के पूजन अर्चन और आरती कर कराया गया।यजमान निवास पर चल रहे सप्त दिवसीय संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन  शनिवार को अन्तर्राष्ट्रीय कथाकार मनोज अवस्थी महराज ने उपस्थित श्रोता समूह को सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष की कथा का सजीव और मार्मिक प्रसंग सुना कर आत्म विभोर कर दिया।
कथाकार ने सुदामा चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान की दृष्टि में सभी मनुष्य समान होते हैं, किंतु निष्कपट हृदय के व्यक्ति ही उन्हें अति प्रिय होते हैं। ईश्वर हमेशा भाव के भूखे होते हैं। वह समस्त भेदभाव से परे होते हैं। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता को  संसार की आदर्श मित्रता बताया।कहा समस्त ऐश्वर्य के स्वामी होने के बाद भी सुदामा को भगवान श्री कृष्ण परम मित्र ही समझते रहे।
उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण की मित्रता समस्त मानव जाति के लिए अनुकरणीय है। कथा का समापन आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। तत्पश्चात आयोजक मंडल के कपिल देव मिश्र, अमित मिश्र, रमेश चंद्र मिश्र व जय प्रकाश मिश्र ने पधारे भगवत प्रेमियों और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों के प्रति धन्यवाद प्रकट करते हुए आभार जताया।विशिष्ट अतिथि को व्यास गद्दी से सम्मानित करने का भी कार्य किया गया।
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