25 साल की सजा पूरी या नहीं? अबू सलेम की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित, जुर्माने और प्रत्यर्पण समझौते पर टिकी नजर
नई दिल्ली।
तहलका 24×7
1993 मुंबई सिलसिलेवार बम विस्फोट मामले के दोषी और गैंगस्टर अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।अदालत के समक्ष मुख्य सवाल यह है कि क्या पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के दौरान भारत द्वारा दी गई 25 वर्ष की अधिकतम सजा की गारंटी के तहत अबू सलेम अपनी सजा पूरी कर चुका है या नहीं।

सुनवाई के दौरान अबू सलेम के वकील ने दलील दी कि विशेष TADA अदालत ने अंडरट्रायल के दौरान जेल में बिताई गई अवधि का लाभ देने का निर्देश दिया था, लेकिन जेल प्रशासन इसका पालन नहीं कर रहा है। उनका दावा है कि अंडरट्रायल में बिताए गए लगभग 12 वर्ष,सजा के दौरान बिताया गया समय और अच्छे आचरण पर मिली छूट को जोड़ने पर 25 वर्ष की अवधि पूरी हो चुकी है।दूसरी ओर,CBI ने अदालत को बताया कि अबू सलेम को दो मामलों में लगाए गए 16.51 लाख रुपये के जुर्माने का भुगतान करना होगा।

एजेंसी का कहना है कि जुर्माना जमा नहीं करने पर अदालत द्वारा निर्धारित अतिरिक्त सजा भी भुगतनी पड़ सकती है।अबू सलेम को वर्ष 2005 में पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था।उस समय भारत ने आश्वासन दिया था कि उसे 25 वर्ष से अधिक कारावास नहीं भुगतना पड़ेगा।इसी शर्त की व्याख्या और सजा की गणना को लेकर वर्षों से कानूनी विवाद चल रहा है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हैं।


















